नमस्कार मैं हूँ देव, आज एक कहानी आप सबके सामने लेकर आया हूँ जिसके जरिये मैंने कोशिश की है बिहार में पिछड़े वर्ग के लोग शिक्षित क्यों नहीं हो पाते है?
रोज की तरह डिनर के बाद व्हाट्सएप की दुनिया में घुसते ही उसका मैसेज आया और फिर बात होने लगी, चूंकि उसकी परीक्षा नजदीक है इसलिए मैंने पूछा," पढ़ाई कैसी चल रही है?" उसने बोली ठीक! फिर इधर उधर की बात शुरू ही हुई थी कि अचानक उसने मुझसे पूछी की," बिहार में पिछड़े वर्ग के लोगों की ऐसी स्थिति क्यों है?" (खास कर शिक्षा को लेकर) मैंने कुछ देर के लिए सोचा कि ये क्या बोल रही है! और फिर दुबारा यही प्रश्न पूछी। मैंने थोड़ा और जानने की कोशिश की तो पता चला कि इस सब के पीछे "जागरूकता" सबसे बड़ा कारण है। मैं पहला प्रश्न में उलझा ही था कि दूसरा प्रश्न फिर आ गया मेरे सामने, "ये लोग जागरूक क्यों नहीं है?" मैं मन ही मन सोच रहा था कि आज इसको क्या हो गया है! लेकिन कुछ भी हो बात तो पते की कर रही है। मैंने भी सोचा कि चलो इसका जबाव ढूंढने की कोशिश करता हूँ, और फिर लग गए कारण ढूंढने।
कुछ समय सोचने के बाद मैं आखिरकार एक बिंदु पर पहुंच ही गया। लोगों को जागरूकता के नाम पर जो मानव श्रृंखला, रैली, गांव चलो अभियान जैसे तमाम जो कोशिशें की जा रही है क्या इसका कुछ प्रभाव पड़ा है? लोगों को जागरूक करने के नाम पर हमारे बिहार में नीतीश बाबू तीसरे वर्ष मानव श्रृंखला का निर्माण कराने जा रहें है परंतु क्या उससे लोग जागरूक हुए है पिछले दो मानव श्रृंखला की निर्माण की बात करें तो उस के बावजूद भी बिहार में शराब की बिक्री हो ही रही है और लोग दहेज के नाम पर मोटा रकम ले ही रहे है। पिछले दो मानव श्रृंखला का निर्माण इन्ही दो चीजों पर लोगों को जागरूक करने को लेकर किया गया था। इस वर्ष भी मानव शृंखला नशामुक्ति व जल-जीवन- हरियाली के पक्ष में तथा सामाजिक कुरीति दहेज व बाल विवाह के खिलाफ होगी अब देखना होगा कि इसका प्रभाव लोगों के ऊपर क्या पड़ता है! खैर ये तो राजनीति की बात हुई। इस सब से हट कर हमारे समाज के लोगों का भी कुछ कर्तव्य बनता है कि जो लोग जागरूक नहीं है उन्हें हम जाकर जागरूक करें। हमारे समाज में मुखिया, सरपंच एवं वार्ड पार्षद जैसे लोग भी रहते है क्या उनलोगों को नहीं सोचना चाहिए कि हम सब पंचायत के लोगों को जागरूक करें? उनलोगों का काम सिर्फ सड़क बनवाने या नल जल योजना के तहत हर घर में नल का पानी पहुंचाने तक ही सीमित नहीं है। हमारे समाज में ऐसे लोग भी रहते है जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत नाम कर चुके होते है परंतु अपने समाज के लिए कितना कुछ कर पाते है? जो लोग बिहार और बिहार के लोगों का नाम रौशन करते है क्या उन्हें अपने समाज के लिए नहीं सोचना चाहिए? हम किसी दूसरे राज्य में जाकर बिहार के बारे में बोलते है परंतु अपनी समाज को सुधारने की तनिक भी कोशिश नहीं करते है। जिस समाज से हम निकले है क्या उस समाज में लोगों को जागरूक करने के लिए हम नहीं आ सकते है? मैं सिर्फ समाज के वरिष्ठ या शिक्षित लोगों की ही बात नहीं कर रहा हूँ बल्कि उनलोगों को खुद भी समझना चाहिये कि हमारी भूमिका समाज में क्या हो सकती है और आगे बढ़ना चाहिए।
ख़ैर उसको तो अपनी प्रश्न का सही जबाव नहीं मिल पाया बल्कि और भी कई सवाल खड़े हो गए। परन्तु हम सब को सोचना चाहिए और आगे आना चाहिए अपने समाज को बदलने के लिए, जागरूक करने के लिए क्योंकि "एक शिक्षित समाज के बिना हम बेहतर देश की कल्पना नहीं कर सकते हैं"
नोट:- अगर मैंने कहीं कुछ गलत लिखा हो तो आप अपना कीमती सुझाव दे सकते है।
!!धन्यवाद!!
देव चौधरी🖋️🖋️

