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आज पूरा विश्व कोरोना वायरस (COVID-19) से परेशान है, और सभी देशों की अर्थव्यवस्था की कमर टूट चुकी है। ऐसे में पहले से मुश्किलें झेल रही भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कोरोना वायरस का हमला एक बड़ी मुसीबत लेकर आया है. पिछले एक साल से ऑटोमोबाइल सेक्टर, रियल स्टेट, लघु उद्योग समेत असंगठित क्षेत्र में सुस्ती छाई हुई थी. बैंक एनपीए की समस्या से अब तक निपट रहे हैं. सरकार निवेश के ज़रिए, नियमों में राहत और आर्थिक मदद देकर अर्थव्यवस्था को रफ़्तार देने की कोशिश कर रही थी. लेकिन, इस बीच कोरोना वायरस के चलते पैदा हुए हालात ने जैसे अर्थव्यवस्था का पहिया जाम कर दिया है. ना तो कहीं उत्पादन है और ना मांग, लोग घरों में हैं और दुकानों पर ताले लगे हैं.
अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पुअर्स ने एक अप्रैल से शुरू हो रहे वित्तीय वर्ष (2020-21) के लिए भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के वृद्धि दर अनुमान को घटाकर 5.2 प्रतिशत कर दिया गया है. ऐजेंसी के मुताबिक़, एशिया-प्रशांत क्षेत्र को कोविड-19 से क़रीब 620 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है.
सरकार ने लॉकडाउन की घोषणा कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए की है. इससे लोग अपने घरों में रहेंगे, सोशल डिस्टेंसिंग बनी रहेगी जिससे वायरस कम से कम फैलेगा.
अनुमान है कि लॉकडाउन का सबसे ज़्यादा असर अनौपचारिक क्षेत्र पर पड़ेगा और हमारी अर्थव्यवस्था का 50 प्रतिशत जीडीपी अनौपचारिक क्षेत्र से ही आता है. ये क्षेत्र लॉकडाउन के दौरान नहीं कर सकता है. वो कच्चा माल नहीं ख़रीद सकते, बनाया हुआ माल बाज़ार में नहीं बेच सकते तो उनकी कमाई बंद ही हो जाएगी.
एक अर्थशास्त्री की माने तो लॉकडाउन से लोग घर पर बैठेंगे, इससे कंपनियों में काम नहीं होगा और काम न होने से व्यापार कैसे होगा और अर्थव्यवस्था आगे कैसे बढ़ेगी. लोग जब घर पर बैठते हैं, टैक्सी बिज़नेस, होटल सेक्टर, रेस्टोरेंट्स, फ़िल्म, मल्टीप्लेक्स सभी प्रभावित होते हैं. जिस सर्विस के लिए लोगों को बाहर जाने की ज़रूरत पड़ती है उस पर बहुत गहरा असर पड़ेगा." इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइज़ेशन के मुताबिक कोरोना वायरस सिर्फ़ एक वैश्विक स्वास्थ्य संकट नहीं रहा, बल्कि ये एक बड़ा लेबर मार्केट और आर्थिक संकट भी बन गया है जो लोगों को बड़े पैमाने पर प्रभावित करेगा. इसके द्वारा लगाए गए अनुमान के अनुसार कोरोना वायरस की वजह से दुनियाभर में ढाई करोड़ नौकरियां ख़तरे में हैं. वहीं संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मेलन के अनुसार यह कहा गया है कि इस महामारी की वजह से विकासशील देशों के ऊपर गहरा प्रभाव पड़ेगा और अनुमान लगाया जा रहा है कि कई लाख करोड वैश्विक आय का नुकसान होगा। वहीं उन्होंने बताया कि चीन इस से बच सकता है इसलिए सम्भव है कि भारत भी इस मंदी से बच जाए।
© Dev choudhary
Reference:-
Economics times
BBC
आज पूरा विश्व कोरोना वायरस (COVID-19) से परेशान है, और सभी देशों की अर्थव्यवस्था की कमर टूट चुकी है। ऐसे में पहले से मुश्किलें झेल रही भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कोरोना वायरस का हमला एक बड़ी मुसीबत लेकर आया है. पिछले एक साल से ऑटोमोबाइल सेक्टर, रियल स्टेट, लघु उद्योग समेत असंगठित क्षेत्र में सुस्ती छाई हुई थी. बैंक एनपीए की समस्या से अब तक निपट रहे हैं. सरकार निवेश के ज़रिए, नियमों में राहत और आर्थिक मदद देकर अर्थव्यवस्था को रफ़्तार देने की कोशिश कर रही थी. लेकिन, इस बीच कोरोना वायरस के चलते पैदा हुए हालात ने जैसे अर्थव्यवस्था का पहिया जाम कर दिया है. ना तो कहीं उत्पादन है और ना मांग, लोग घरों में हैं और दुकानों पर ताले लगे हैं.
अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पुअर्स ने एक अप्रैल से शुरू हो रहे वित्तीय वर्ष (2020-21) के लिए भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के वृद्धि दर अनुमान को घटाकर 5.2 प्रतिशत कर दिया गया है. ऐजेंसी के मुताबिक़, एशिया-प्रशांत क्षेत्र को कोविड-19 से क़रीब 620 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है.
सरकार ने लॉकडाउन की घोषणा कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए की है. इससे लोग अपने घरों में रहेंगे, सोशल डिस्टेंसिंग बनी रहेगी जिससे वायरस कम से कम फैलेगा.
अनुमान है कि लॉकडाउन का सबसे ज़्यादा असर अनौपचारिक क्षेत्र पर पड़ेगा और हमारी अर्थव्यवस्था का 50 प्रतिशत जीडीपी अनौपचारिक क्षेत्र से ही आता है. ये क्षेत्र लॉकडाउन के दौरान नहीं कर सकता है. वो कच्चा माल नहीं ख़रीद सकते, बनाया हुआ माल बाज़ार में नहीं बेच सकते तो उनकी कमाई बंद ही हो जाएगी.
एक अर्थशास्त्री की माने तो लॉकडाउन से लोग घर पर बैठेंगे, इससे कंपनियों में काम नहीं होगा और काम न होने से व्यापार कैसे होगा और अर्थव्यवस्था आगे कैसे बढ़ेगी. लोग जब घर पर बैठते हैं, टैक्सी बिज़नेस, होटल सेक्टर, रेस्टोरेंट्स, फ़िल्म, मल्टीप्लेक्स सभी प्रभावित होते हैं. जिस सर्विस के लिए लोगों को बाहर जाने की ज़रूरत पड़ती है उस पर बहुत गहरा असर पड़ेगा." इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइज़ेशन के मुताबिक कोरोना वायरस सिर्फ़ एक वैश्विक स्वास्थ्य संकट नहीं रहा, बल्कि ये एक बड़ा लेबर मार्केट और आर्थिक संकट भी बन गया है जो लोगों को बड़े पैमाने पर प्रभावित करेगा. इसके द्वारा लगाए गए अनुमान के अनुसार कोरोना वायरस की वजह से दुनियाभर में ढाई करोड़ नौकरियां ख़तरे में हैं. वहीं संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मेलन के अनुसार यह कहा गया है कि इस महामारी की वजह से विकासशील देशों के ऊपर गहरा प्रभाव पड़ेगा और अनुमान लगाया जा रहा है कि कई लाख करोड वैश्विक आय का नुकसान होगा। वहीं उन्होंने बताया कि चीन इस से बच सकता है इसलिए सम्भव है कि भारत भी इस मंदी से बच जाए।
© Dev choudhary
Reference:-
Economics times
BBC