भारत को कृषि प्रधान देश कहा जाता है। कई दशक पहले देश के अधिकांश भागों में खेती का काम किया जाता था। उस समय लोग इतने आधुनिक नहीं थे और न ही लोगों के पास आज जैसे कोई आधुनिक उपकरण थे फिर भी किसान खुद से मिट्टी को चीर कर खेती करते थे। चूँकि हमारा देश उस वक़्त बहुत ज्यादा विकसित नहीं था इसलिए अधिकतर लोग कृषि पर निर्भर रहते थे। इस मिट्टी को अपना सर्वस्व मान कर इससे ज़िंदगी व्यतीत करते थे। उस समय कुछ कवियों के द्वारा एक किसान को स्वंय भगवान का रूप कहा गया है क्योंकि हमारा अन्नदाता खेत में काम करने वाला एक किसान है इसलिए उन्हें भगवान कहा गया। जैसे-जैसे देश में आधुनिकता को बढ़ावा मिला, नए नए रोजगार आए। नई-नई तकनीक आईं लोगों की रुचि कृषि की तरफ कम होने लगी तथा लोग दूसरे काम धंधो में लग गए। पिछली जनगणना के अनुसार हमारे देश में प्रतिदिन करीब 2200 लोग किसानी छोड़ रहे है। हाँ कृषि की तरफ उनका झुकाव कम होने का एक कारण यह भी है कि उन्हें अच्छी लागत नहीं मिलती है। ना ही उन्हें ज्यादा मदद मिलती है।
लेकिन वर्तमान समय में जब कोरोना वायरस के कारण देश में लॉकडाउन लगाया गया। काफी संख्या में लोग पलायन करने पर विवश हो गए तथा फिर से अपनी जन्मभूमि की ओर निकल पड़े। ताजा आंकड़े के मुताबिक उत्तर प्रदेश, बिहार,मध्यप्रदेश, राजस्थान में लाखों की तादाद में लोग अपने घर लौटे है। जिसमे मजदूर वर्ग के लोगों की संख्या काफी ज्यादा है। इससे उन लोगों में कृषि की तरफ झुकाव होने की स्थिति बन सकती है। क्योंकि कहीं न कहीं इन लोगों की रुचि कृषि क्षेत्र में ज्यादा हो सकती है। मुझे तो पूर्ण विश्वास है कि फिर से हमारे देश में कृषकों की संख्या में वृद्धि होगी।

