Sunday, 24 November 2019

देश में सब ठीक है?

आज हमारा देश किस मोड़ पर खड़ा है,
     देश के चारों स्तम्भ हाशिये पर आ गया हैं। इस सब के पीछे कुछ भी कारण हो सकता है चाहे वो सत्ता का दबाव हो या सत्ता का सुख! आज न्यायपालिका और कार्यपालिका एक दूसरे आरोप लगा रहें है। विधायिका भी सत्ता के शहंशाह के गिररफ्त में आने लगे है, जिनके साथ खरीद फरोख्त हो रहा है। और मीडिया इनके बारे में तो पहले से ही भ्रामक फैला हुआ हैं जो कहीं न कहीं एक हद तक सच भी है। लेकिन क्या कभी हमने ऐसा सोचा है कि इन सब के पीछे कौन है? किसका हाथ है? #PM का #CM? का या किसी और का? अगर किसी और का तो किसका?
        मैं बताता हूँ, इन सब के पीछे कारण है हमारा लोकतंत्र, हमारा संविधान और हमसब, जिसका गलत इस्तेमाल किया जा रहा हैं।
                पिछले 1 महीने का राजनीतिक घटनाक्रम इन सब का जीता जागता उदाहरण हैं।

#चिन्टूओ_से_सावधान!

ज्यादा नहीं लिखूंगा, बस मन की भड़ास निकालने का इस ज़रिया का इस्तेमाल कर रहा हूँ।
धन्यवाद🙏🙏

Friday, 15 November 2019

आइये जानते है राष्ट्रीय प्रेस दिवस के मौके पर, प्रेस का महत्व!



        प्रथम प्रेस आयोग ने भारत में प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा एंव पत्रकारिता में उच्च आदर्श कायम करने के उद्देश्य से एक प्रेस परिषद की कल्पना की थी। परिणाम स्वरूप चार जुलाई 1966 को भारत में प्रेस परिषद की स्थापना की गई जिसने 16 नंवबर 1966 से अपना विधिवत कार्य शुरू किया। तब से लेकर आज तक प्रतिवर्ष 16 नवंबर को राष्ट्रीय प्रेस दिवस के रूप में मनाया जाता है।

विश्व में आज लगभग 50 देशों में प्रेस परिषद या मीडिया परिषद है। भारत में प्रेस को वाचडॉग एंव प्रेस परिषद इंडिया को मोरल वाचडॉग गया है। राष्ट्रीय प्रेस दिवस, प्रेस की स्वतंत्रता एंव जिम्मेदारियों की ओर हमारा ध्यान आकृष्ट करता है।

आज पत्रकारिता का क्षेत्र व्यापक हो गया है। पत्रकारिता जन-जन तक सूचनात्मक, शिक्षाप्रद एवं मनोरंजनात्मक संदेश पहुँचाने की कला एंव विधा है। समाचार पत्र एक ऐसी उत्तर पुस्तिका के समान है जिसके लाखों परीक्षक एवं अनगिनत समीक्षक होते हैं। अन्य माध्यमों के भी परीक्षक एंव समीक्षक उनके लक्षित जनसमूह ही होते है। तथ्यपरकता, यथार्थवादिता, संतुलन एंव वस्तुनिष्ठता इसके आधारभूत तत्व है। परंतु इनकी कमियाँ आज पत्रकारिता के क्षेत्र में बहुत बड़ी त्रासदी साबित होने लगी है। पत्रकार चाहे प्रशिक्षित हो या गैर प्रशिक्षित, यह सबको पता है कि पत्रकारिता में तथ्यपरकता होनी चाहिए। परंतु तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर, बढ़ा-चढ़ा कर या घटाकर सनसनी बनाने की प्रवृति आज पत्रकारिता में बढ़ने लगी है।

खबरों में पक्षधरता एवं अंसतुलन भी प्रायः देखने को मिलता है। इस प्रकार खबरों में निहित स्वार्थ साफ झलकने लग जाता है। आज समाचारों में विचार को मिश्रित किया जा रहा है। समाचारों का संपादकीयकरण होने लगा है। विचारों पर आधारित समाचारों की संख्या बढऩे लगी है। इससे पत्रकारिता में एक अस्वास्थ्यकर प्रवृति विकसित होने लगी है। समाचार विचारों की जननी होती है। इसलिए समाचारों पर आधारित विचार तो स्वागत योग्य हो सकते हैं, परंतु विचारों पर आधारित समाचार अभिशाप की तरह है।

मीडिया को समाज का दर्पण एवं दीपक दोनों माना जाता है। इनमें जो समाचार मीडिया है, चाहे वे समाचारपत्र हो या समाचार चैनल, उन्हें मूलतः समाज का दर्पण माना जाता है। दर्पण का काम है समतल दर्पण का तरह काम करना ताकि वह समाज की हू-ब-हू तस्वीर समाज के सामने पेश कर सकें। परंतु कभी-कभी निहित स्वार्थों के कारण ये समाचार मीडिया समतल दर्पण का जगह उत्तल या अवतल दर्पण का तरह काम करने लग जाते हैं। इससे समाज की उल्टी, अवास्तविक, काल्पनिक एवं विकृत तस्वीर भी सामने आ जाती है।

तात्पर्य यह है कि खोजी पत्रकारिता के नाम पर आज पीली व नीली पत्रकारिता हमारे कुछ पत्रकारों के गुलाबी जीवन का अभिन्न अंग बनती जा रही है। भारतीय प्रेस परिषद ने अपनी रिपोर्ट में कहा भी है 'भारत में प्रेस ने ज्यादा गलतियाँ की है एंव अधिकारियों की तुलना में प्रेस के खिलाफ अधिक शिकायतें दर्ज हैं।'

पत्रकारिता आजादी से पहले एक मिशन थी। आजादी के बाद यह एक प्रोडक्शन बन गई। हाँ, बीच में आपातकाल के दौरान जब प्रेस पर सेंसर लगा था। तब पत्रकारिता एक बार फिर थोड़े समय के लिए भ्रष्टाचार मिटाओं अभियान को लेकर मिशन बन गई थी। धीरे-धीरे पत्रकारिता प्रोडक्शन से सेन्सेशन एवं सेन्सेशन से कमीशन बन गई है।

परंतु इन तमाम सामाजिक बुराइयों के लिए सिर्फ मीडिया को दोषी ठहराना उचित नहीं है। जब गाड़ी का एक पुर्जा टूटता है तो दूसरा पुर्जा भी टूट जाता है और धीरे-धीरे पूरी गाड़ी बेकार हो जाती है। समाज में कुछ ऐसी ही स्थिति लागू हो रही है। समाज में हमेशा बदलाव आता रहता है। विकल्प उत्पन्न होते रहते हैं। ऐसी अवस्था में समाज अमंजस की स्थिति में आ जाता है।

इस स्थिति में मीडिया समाज को नई दिशा देता है। मीडिया समाज को प्रभावित करता है, लेकिन कभी-कभी येन-केन प्रकारेण मीडिया समाज से प्रभावित होने लगता है। राष्ट्रीय प्रेस दिवस के अवसर पर देश क ी बदलती पत्रकारिता का स्वागत है बशर्ते वह अपने मूल्यों और आदर्शों की सीम ा- रेखा कायम रखें।

Source:- Manoj Dyal

Sunday, 27 October 2019

यहां पर एक दिन पहले मनाई जाती है दिवाली, ये है पौराणिक वजह...



#दरभंगा. बिहार के दरभंगा (Darbhanga) जिले में एक ऐसा गांव है, जहां दिवाली के एक दिन पहले मानई जाती है. इस दिन पूरे गांव के लोग नवादा भगवती (Nawada Bhagwati) के मन्दिर को सजाते हैं. कहा जाता है कि दरभंगा के महाराज भी एक दिन पहले इस गांव में दिवाली मनाने आते थे. तभी से यह परंपरा चली आ रही है. आज भी इस गांव में दीपावली(Deepawali) से एक दिन पहले दीपोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है.

दरअसल, हम बात कर रहे हैं दरभंगा जिला के नवादा गांव के बारे में. यदि आप दीपावली से एक दिन पहले यहां पर आएंगे तो देख कर चौंक जाएंगे. क्योंकि नवादा गांव के लोग दिवाली से एक दिन पहले से दीपोत्सव मनाते हैं. इस दिन गांव के बड़े, बुजुर्ग दीप जलाते हैं तो बच्चे पटाखे जलाकर खुशियां मनाते हैं. इस गांव की महिलाएं भी एक दिन पहले ही दिवाली मना लेती हैं. महिलाएं अपने-अपने घरों में लक्ष्मी माता की पूजा करती हैं. वहीं, शाम ढलते ही पूरा गांव रोशनी से जगमगा उठता है. इस बार भी पुरानी परम्परा को निभाते हुए 26 अक्टूबर को दीपावली ही मनाई गई....

साभार:- Duta News.

Wednesday, 16 October 2019

खत्म हो गई अयोध्या का संघर्ष फैसला आना बाकी



       तारीख पर तारीख तारीख पर तारीख अब यह डायलॉग अयोध्या के लिए छोड़ने का वक्त आ गया है, क्योंकि इस मामले पर आज अंतिम सुनवाई हो गई। मंगलवार को ही लगभग यह तय हो गया था कि बुधवार तक सभी पक्षों की सुनवाई पूरी कर ली जाएगी। हालात को देखते हुए अयोध्या में पहले से ही धारा 144 लागू कर दिया गया है। जिससे वहां के आम नागरिक भी प्रभावित हो रही है। उनका सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। आखिरकार केस के 40 वें दिन निर्धारित समय सीमा से 1 दिन 1 घंटा पहले ही दिन भर के ड्रामे के बीच सुनवाई पूरी कर ली गई। सुप्रीम कोर्ट फैसला अपने पास सुरक्षित रखते हुए सभी पक्षों को लिखित दस्तावेजों को जमा करने के लिए 3 दिन का समय सीमा दिया है।
           हालांकि कुछ लोगो का मानना है कि फैसला मंदिर के पक्ष में ही जायेगा वही कुछ लोगो का कहना है कि अभी सस्पेंस की स्थिति है कुछ कहना जायज नही होगा। चाहे फैसला किसी पक्ष में जाये लेकिन जीत तो लोकतंत्र का ही होगा क्योंकि सभी पक्ष एक कोर्ट के फैसले के लिए रुका हुआ है। यह लोकतंत्र की मर्यादा को दर्शाता है।
 #इस पर आपकी क्या राय है?
                                                        ©देवशंकर

Tuesday, 1 October 2019

"गांधी जी और शास्त्री जी के जन्म जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन"


             आज का दिन बहुत ही पावन दिन है क्योंकि आज के दिन में दो महान महापुरुषों का जन्म हुआ है। एक ओर जहां सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने वाले महात्मा गांधी जी का जन्म हुआ वहीं दूसरी ओर अपने कार्य के प्रति निष्ठावान, कर्तव्यनिष्ठ और सादगी पूर्ण लाल बहादुर बहादुर शास्त्री जी का जन्म हुआ। हमारे देश को आजादी दिलाने में इन दोनों महापुरुषों का अहम योगदान रहा था। गांधी जी ने जहां सत्य और अहिंसा का रास्ता अपना कर अंग्रेजों को घुटने टेकने पर मजबूर किया, वहीं दूसरी ओर शास्त्री जी ने नारा दिया "मरो नहीं मारो" ! यह नारा पूरे देश में एक क्रांति को जन्म दिया, जो देश में फैले अंग्रेजों के शासन को खत्म करने का काम किया। शास्त्री जी का देश के दूसरे प्रधानमंत्री के रूप में कार्यकाल बहुत ही स्वर्णिम रहा है। भारतवर्ष हमेशा इनदोनो को याद रखेगा।
             आज पूरा देश गांधी जी की और शास्त्री जी का जन्म जयंती मना रहा है। आइए हम इन महापुरुषों के द्वारा बताए मार्ग पर चलकर भारत को एक नई पहचान दिलाने में अपनी भूमिका निभाए।
                                                   ©देवशंकर🖋️🖋️
                                               

केजरीवाल के बयान पर बवाल!


      जब आप किसी गरिमामयी पद पर होते हैं तब आपको एक एक शब्द का चुनाव बड़े ही इत्मीनान से करना चाहिए। कुछ दिन पहले दिल्ली की स्वास्थ्य सेवाओं की तारीफ करते आम आदमी पार्टी प्रमुख तथा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कुछ ऐसा बयान दे दिया कि जिससे वे आजकल सुर्खियों में है। दरअसल एक स्वास्थ्य कार्यक्रम में स्वास्थ्य सेवाओं की तारीफ कर रहे थे। स्वास्थ्य सेवाओं की तुलना अलग-अलग राज्यों से करने लगे। इसी दौरान उनके द्वारा एक और बात कही गई। वह बोले कि बिहार से लोग 500 रूपये का टिकट लेकर ट्रेन से दिल्ली आते हैं और यहां 5 लाख का इलाज मुफ्त में करा कर चले जाते हैं। केजरीवाल के इस बयान को लेकर बिहारियों में आक्रोश देखा जा सकता है। मुख्यमंत्री के द्वारा यह बयान तब दिया गया है जब दिल्ली में विधानसभा चुनाव नजदीक है और दिल्ली में 18% बिहारी रहते हैं। इसका खामियाजा कहीं आने वाले समय मे भुगतना न पड़े?
           केजरीवाल के इस बयान से बिहार सरकार के लिए भी कई सारे प्रश्न खड़े होते हैं। बिहार की स्वास्थ्य सेवाएँ बिगड़ चुकी है? राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर महज लूट होती है? बिहार बजट में स्वास्थ्य विभाग के लिए अनुमानित हजारों करोड़ की राशि कहाँ जाती हैं? जबकि नीतीश कुमार का एक बड़ा एजेंडा स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाना है। ऐसे में बिहारवासियों को अपनी भावनाओं से हटकर बिहार सरकार से प्रश्न पूछना चाहिए।


                                                    ©देवशंकर🖋️🖋️

Thursday, 26 September 2019

सोशल_मीडिया_का_हो_सदुपयोग!



       जिस तरह से आज के दौर में सोशल मीडिया का दुरुपयोग बढ़ता जा रहा है,यह कहना गलत नहीं होगा कि आने वाले समय में यह काफी प्रभाव डालेगा। अब तो सोशल मीडिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट को भी बोलना पड़ा, कोर्ट ने कहा कि सरकार को इस पर कोई सख्त कदम उठानी चाहिए हालांकि यह कहना गलत होगा कि इसका दुरुपयोग ही हो रहा है।।         

               सोशल मीडिया का सदुपयोग भी हो रहा है लेकिन बड़ी मात्रा में इसके जरिए झूठी खबरें,भ्रामक प्रचार, अन्य घटनायें फैलाया जाता है। अमेरिकी चुनाव के दौरान भी सोशल मीडिया पर संगीन आरोप लग चुके हैं। यह आरोप फेसबुक का डाटा चोरी का था। हालांकि व्हाट्सएप ने इस पर कुछ हद तक लगाम लगाने की कोशिश किया है परंतु वह पूर्ण रूप से प्रभावी नहीं हुआ है। अब तो हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी भी कह रहे हैं कि मैं ख़ुद सोशल मीडिया पर एक्टिव रहता हूँ और वहां से बहुत अच्छी चीजें भी पता चलता हैं। लेकिन भारी मात्रा में अफवाहें भी रहती है। सरकार को इस पर जल्द ही कोई निर्णय लेनी चाहिए ताकि इस से होने वाले दुष्प्रभाव को रोका जा सकें।

                                                   ©देवशंकर🖋️🖋️🖋️

Friday, 6 September 2019

यातायात के नए नियम से अवगत हो लोग।


यातायात के नए नियम से अवगत हो लोग।

         

       नए यातायात नियमों को लेकर उठ रहे सवालों के बीच केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि नए प्रावधानों का उद्देश्य ट्रैफिक नियमों का पालन करना सुनिश्चित करना है न कि सरकार का खजाना भरना। उन्होंने एक औसतन आंकड़ा बताया कि भारत में प्रतिवर्ष करीब 5 लाख सड़क दुर्घटनाएं होती है, जिनमे तकरीबन डेढ़ लाख लोगों की जान जाती है। यहां सरकार का मकसद लोगों से यातायात जुर्माने के नाम पर भारी-भरकम रुपया वसूलना नहीं है, वह स्पष्ट करना चाहते हैं कि नियम का उल्लंघन करना कितना महंगा है। साथ ही उन्होंने यह समझाने का प्रयास किया है कि लोगों की जान की क्या कीमत है? यहां जनता को खुद समझना होगा कि आखिर सरकार को ऐसा कदम क्यों उठाना पड़ा? हम सब को जागरूक होना होगा और सरकार की इस मुहिम में साथ देना होगा, कुछ दिनों से हम सब खुद दहशत का माहौल बना रहे हैं की ट्रैक्टर चालक से ₹50000 तो बाइक सवार से ₹25000 वसूला, ऐसे समाचारों को साझा करेंगे तो जाहिर सी बात है दहशत पैदा होगी।
            सड़क दुर्घटनाओं का कारण वाहन चालकों की लापरवाही है लेकिन इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि इसका दूसरा कारण सड़कों के डिजाइन में खामी, सड़कों पर अतिक्रमण, आवारा पशु, रोशनी की कमी है। अब ऐसी कोई व्यवस्था होनी चाहिए कि ट्रैफिक पुलिस यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ इलेक्ट्रॉनिक सुबूतों से लैस हो। साथ ही सरकारी वाहन किसी तरह की रियायत ना पाए और भारी वाहनों पर खास निगाह रखी जाए।
                                                     ©देवशंकर🖋️🖋️
  
                                                   

Friday, 23 August 2019

मकरमपुर में कल होगा ध्वजारोहण.


बिहार, दरभंगा, बेनीपुर:- क्षेत्र के मकरमपुर गांव में भादव कृष्ण पक्ष नवमी को ध्वजारोहण का परंपरा रहा है, जो 24 अगस्त को ग्राम स्थित बजरंगबली मंदिर प्रांगण में हजारों की संख्या में भक्तों के द्वारा ध्वजारोहण किया जाएगा। इस दौरान यहां भक्तिमय माहौल रहता है। विभिन्न जगहों से श्रद्धालु यहां ध्वजा अर्पित करने पहुंचते हैं। जिस कारण से पूरे गांव में भीड़ का मंजर रहता है। यह मान्यता है कि कोई भक्त मनोकामना मांगता है, तो उसे पूरी हो जाने के बाद यहां ध्वजा अर्पण करना होता है। यूँ तो पूरे देश में रामनवमी को ध्वजारोहण होता है, लेकिन यहां की परंपरा कुछ अलग है। जिस कारण यहां भादव महीने में कृष्ण पक्ष नवमी को ध्वजारोहण होता है।
               आपको बता दें कि यहां का इतिहास बहुत पुराना रहा है ग्रामीण मोद नारायण चौधरी बताते हैं कि मकरमपुर गाँव के सभी मुल वासिन्दे जलेवार गरौल के हैं। गरौल जो अभी तारडीह प्रखंड में अवस्थित है ,यहाँ भुतकाल में अन्य धर्मावलंबियों से उपद्रव ग्रस्त होने के कारण वहाँ से अभी के गाँव मकरमपुर जो सर्वे के अनुसार परूषोत्तमपुर के नाम से जाना जाता है,यहां आकर बस गये, जो भादव कृष्ण नवमी का दिन था। उसी दिन महावीर जी का ध्वजारोहण किया गया।कालान्तर में दरभंगा महाराज से यहाँ का एक परिवार जो अभी बंगला घराना के नाम से जाना जाता है ,उनका हरीयठ मौजा को लेकर भीषण लडाई हुई जिसमें कानूनी ढंग से इनलोगों कि जीत हुई। इसी संदर्भ में ये लोग यह मनौती किये कि अगर हमारी जीत हुई तो दोहरी ध्वजा महावीर जी को देंगे। धीरे-धीरे इसका कई लोगो के द्वारा अनुसरण किया गया अौर लोग अपनी मनोकामना पुरा होने पर ध्वजा देने लगे । यहाँ भूत पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय ललित नारायण मिश्रा ,पं हरिनाथ मिश्र,पूर्व सांसद कृति झा आजाद तथा वर्तमान सांसद गोपाल जी ठाकुर सहित बहुत गणमान्य लोगों ने मनोकामना पुर्ण होने के उपरान्त ध्वजारोजण किया। यहाँ महावीर जी का मुख्य प्रसाद के रूप में चूड़ा -दही ,लड्डू ,केला ,मिठाई आदि का भोग लगाया जाता है तथा प्रत्येक ध्वजा पर तीन ब्राह्मण ,दो कुंवारी कन्या को प्रसाद भोजन कराया जाता है। इसका मुख्य पुजन बंगला परिवार के द्वारा करवाया जाता है। इस दिन यहां विभिन्न जिलों,प्रदेशों, शहर सहित पड़ोसी देश नेपाल के लोग हजारों की संख्या में ध्वजारोहण करते हैं तथा मनौति पुरा करते है।

Monday, 19 August 2019

जल संकट एक गम्भीर ख़तरा?


                आज जल संकट से हर कोई वाकिफ है जिस तरह से जल संकट बढ़ रही है वो आने वाले भविष्य के लिए अच्छा संकेत नही हैं। हमारी भारत ही नही दुनिया की हर तीसरी देश इस संकट से जूझ रही हैं। आने वाले दिनों में स्थिति और भी भयावह हो जाएगी। जिस तरह से हम लोग पानी को व्यर्थ समझ रहे है वह भविष्य में हमारे मानव जीवन के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं। हमारी सोच बदलनी होगी और पानी के महत्व को समझना होगा ताकि हमारी आने वाली पीढ़ी को पानी मिल सकें। पानी का सदुपयोग कैसे करें ये हमसब को गुजरात और राजस्थान से सीखना चाहिए, वहां पर बारिश की पानी का भंडारण किया जाता है और फिर इसे खेती के लिए उपयोग किया जाता हैं। जल संकट के कई सारे कारण है जैसे कि जनसंख्या, मुफ्त बिजली,प्रदूषण, बच्चो को पानी का महत्व न समझाना, ये सब कुछ कारण है अगर हमसब मिलकर इस पर ध्यान दे तो आने वाले समय मे जल संकट का खतरा कम हो सकता हैं।

                                              ©देवशंकर🖋️🖋️
                           devshanker.jimmc@gmail.com

Saturday, 10 August 2019

पाकिस्तान की बदहवासी आयी सामने!

                       "पाकिस्तान की बौखलाहट"   
   
          
          भारत सरकार के ऐतिहासिक कदम की चर्चा सभी ओर हो रहीं है। जिस तरह से भाजपा सरकार ने अपने घोषणा के मुताबिक सत्ता में वापसी करते ही जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और धारा 35 ए को खत्म कर दिया, उससे सभी चकित है। ख़ास कर अगर हम पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की बात करें तो समझेंगे की इस अनुच्छेद को हटाने से सबसे बड़ा झटका उसको ही लगा है। जिस तरह से पाकिस्तान ने भारतीय उच्चायुक्त को वापस भेजने का फैसला लिया और राजनीतिक सम्बन्धों को तोड़ रहे हैं उससे उसकी बौखलाहट साफ झलक रही हैं। जहां तक राजनायिक सम्बंध तोड़ने की बात है तो सभी को पता है कि भारत के सुरक्षा सलाहकार करीब एक अर्से से इसकी मांग कर रहें थे। इस बात पर भारत को तनिक भी चिंतनीय होने की जरूरत नहीं हैं।
                    अब ऐसा लगता हैं कि जिस तरह पाकिस्तान ने जल्दबाजी में यह कदम उठाया है वह उस पर ही कहीं भारी न पड़ जाये। पाकिस्तान जिस तरह से इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में उठाने की बात कर रहा है, शायद वह वाकिफ नहीं हैं कि इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र महज एक कागज का टुकड़ा हैं। पाकिस्तानी चाहे कुछ भी बोलें लेकिन सबको पता हैं कि इसका प्रभाव भारत पर तनिक भी नही पड़ेगा।

Friday, 9 August 2019

खाने को मत तौलो धर्म की तराजू पर!

                  "खाने को मत तौलो धर्म की तराजू पर"

                पूरे विश्व में भारत देश एक ऐसा देश है जहां सभी धर्मों को एक समान देखा जाता है। ऐसे में अगर भारत में खाने को लेकर धर्म पर सवाल उठता है इसे बड़ी निन्दनीय बात नहीं हो सकती हैं। जिस तरह से कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर एक डिलीवरी ब्वॉय से खाना लेने से पहले उसका धर्म जानने को लेकर मुद्दा गर्म हुआ था यह हमारे भारत की संस्कृति सभ्यता को चोट पहुंचाती दिखीं। उस आदमी ने धर्म जानने से पहले क्या यह नहीं सोचा कि यह अन्न कहां से आया, इसे किस धर्म के लोगों ने उपजाया होगा। एक ओर हम धरती से अंतरिक्ष तक अपना वर्चस्व कायम करने में लगे हैं और दूसरी ओर हम खाने को धर्म की तराजू में तौल रहे हैं। हमें खाने का अपमान करने से पहले एक पल के लिए यह जरूर सोचना चाहिए कि आज जिस खाने को अपमान कर रहे हैं वह खाना किसी-किसी को नसीब तक नहीं होता है।
               आजकल धर्म के नाम पर बहस छिड़ी हुई है जो हमारे भारत के लिए आहितकारी साबित हो सकते हैं क्योंकि भारत को आपसी भाईचारे के लिए जाना जाता है। भारत में खाने और पानी को लेकर जाति-धर्म की राजनीति नहीं करनी चाहिए। इस तरह की सोच रखने वाले भविष्य में भारत के लिए खतरा साबित हो सकते हैं।

एक देश एक विधान सपना हुआ साकार!

             "एक देश एक विधान सपना हुआ साकार"

             हमारा भारत 1947 में आजाद हुआ और उसी के साथ देश में बहुत बड़ा विवाद सामने आया जम्मू और कश्मीर को लेकर। जब देश आजाद हुआ तब भारत 565 खंडों में विभाजित था। यह सब छोटे-छोटे रियासते रियासते रियासते हुआ करते थे। आजादी के दौरान पाकिस्तान का निर्माण हुआ एक अलग देश के तौर पर में। आजादी के बाद सभी रियासतों के सामने तीन प्रावधान रखे गए, पहला आप भारत में मिल जाए दूसरा पाकिस्तान में मिल जाए और तीसरा आप स्वतंत्र रहे यानी सबसे अलग रहे। सभी रियासतें भारत में शामिल हो गए सिर्फ जम्मू-कश्मीर को छोड़कर क्योंकि वे एक अलग देश बनकर रहना चाहते थे। उस समय वहां के राजा हरि सिंह थे। पाकिस्तान चाह रहा था कि जम्मू-कश्मीर मुझ में मिल जाए, जब उनका यह योजना काम नहीं किया तो उन्होंने अपने कबालियो को भेजकर वहां हमला कर दिया। जिस पर महाराजा हरि सिंह ने भारत में विलय सिंह ने भारत में विलय महाराजा हरि सिंह ने भारत में विलय सिंह ने भारत में विलय ने भारत में विलय करना मुनासिब समझा। 1949 में घाटी में एक अनुच्छेद लागू किया गया, जिसके खिलाफ खुद बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर साहेब साहेब भीमराव अंबेडकर ने भी बोला था। उस समय उस अनुच्छेद में यह था कि जम्मू और कश्मीर को एक विशेष राज्य का दर्जा मिले और भारत सरकार को घाटी में सिर्फ सुरक्षा विदेशी मामले और संचार पर ही अनुमति होंगी। इसके अलावा केंद्र की कोई भी संविधान वहां लागू नहीं होगा, जब तक वहां के विधानसभा से पारित कर दें। 1954 में इसी अनुच्छेद के तहत एक और धारा जोड़ी गई धारा 35 ए जिसमें खासकर वहां की नागरिकता को लेकर ध्यान दिया गया था। उसी समय से इस अनुच्छेद का विरोध होने लगा था और उस समय कांग्रेस के कैबिनेट मंत्री डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने श्यामा प्रसाद प्रसाद मंत्री डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने खुलकर इसका विरोध किया। इसके लिए बड़े स्तर पर आंदोलन किये, उनका नारा था "एक देश एक विधान एक प्रधान" जिसके लिए उन्होंने अपनी प्राण न्योछावर कर दी थी। 2019 में जब भाजपा की देश में वापसी हुई तो अपनी घोषणा पत्र के मुताबिक इस अनुच्छेद को खत्म करने को लेकर कदम उठाया। किसी ने सच ही कहा कि सब्र का फल मीठा होता है लेकिन यह सब्र का फल यहां तक जाएगी किसी को नहीं पता था। अब कश्मीर एक आम राज्य की तरह हो गया है, हां एक बात की जम्मू और कश्मीर को राज्य के साथ-साथ केंद्र शासित प्रदेश के दायरे में लिया गया है, और लद्दाख को भी एक अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया है। अब घाटी में वे सभी संविधान एवं नियम लागू होंगे जो कि देश के सभी राज्यों में लागू होते हैं। निश्चित ही यह फैसला घाटी वासियों को फायदा पहुंचाया। जम्मू कश्मीर की सूरत बदल जाएगी।

बचपन वाला सरस्वती पूजा

 सरस्वती पूजा, ये पर्व महज एक दिन का होता है, लेकिन इसकी तैयारी में महीने भर से जुट जाते थे। लोगों को इकट्ठा करना, चंदा के लिए पैसे जुटाना, ...