"एक देश एक विधान सपना हुआ साकार"
हमारा भारत 1947 में आजाद हुआ और उसी के साथ देश में बहुत बड़ा विवाद सामने आया जम्मू और कश्मीर को लेकर। जब देश आजाद हुआ तब भारत 565 खंडों में विभाजित था। यह सब छोटे-छोटे रियासते रियासते रियासते हुआ करते थे। आजादी के दौरान पाकिस्तान का निर्माण हुआ एक अलग देश के तौर पर में। आजादी के बाद सभी रियासतों के सामने तीन प्रावधान रखे गए, पहला आप भारत में मिल जाए दूसरा पाकिस्तान में मिल जाए और तीसरा आप स्वतंत्र रहे यानी सबसे अलग रहे। सभी रियासतें भारत में शामिल हो गए सिर्फ जम्मू-कश्मीर को छोड़कर क्योंकि वे एक अलग देश बनकर रहना चाहते थे। उस समय वहां के राजा हरि सिंह थे। पाकिस्तान चाह रहा था कि जम्मू-कश्मीर मुझ में मिल जाए, जब उनका यह योजना काम नहीं किया तो उन्होंने अपने कबालियो को भेजकर वहां हमला कर दिया। जिस पर महाराजा हरि सिंह ने भारत में विलय सिंह ने भारत में विलय महाराजा हरि सिंह ने भारत में विलय सिंह ने भारत में विलय ने भारत में विलय करना मुनासिब समझा। 1949 में घाटी में एक अनुच्छेद लागू किया गया, जिसके खिलाफ खुद बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर साहेब साहेब भीमराव अंबेडकर ने भी बोला था। उस समय उस अनुच्छेद में यह था कि जम्मू और कश्मीर को एक विशेष राज्य का दर्जा मिले और भारत सरकार को घाटी में सिर्फ सुरक्षा विदेशी मामले और संचार पर ही अनुमति होंगी। इसके अलावा केंद्र की कोई भी संविधान वहां लागू नहीं होगा, जब तक वहां के विधानसभा से पारित कर दें। 1954 में इसी अनुच्छेद के तहत एक और धारा जोड़ी गई धारा 35 ए जिसमें खासकर वहां की नागरिकता को लेकर ध्यान दिया गया था। उसी समय से इस अनुच्छेद का विरोध होने लगा था और उस समय कांग्रेस के कैबिनेट मंत्री डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने श्यामा प्रसाद प्रसाद मंत्री डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने खुलकर इसका विरोध किया। इसके लिए बड़े स्तर पर आंदोलन किये, उनका नारा था "एक देश एक विधान एक प्रधान" जिसके लिए उन्होंने अपनी प्राण न्योछावर कर दी थी। 2019 में जब भाजपा की देश में वापसी हुई तो अपनी घोषणा पत्र के मुताबिक इस अनुच्छेद को खत्म करने को लेकर कदम उठाया। किसी ने सच ही कहा कि सब्र का फल मीठा होता है लेकिन यह सब्र का फल यहां तक जाएगी किसी को नहीं पता था। अब कश्मीर एक आम राज्य की तरह हो गया है, हां एक बात की जम्मू और कश्मीर को राज्य के साथ-साथ केंद्र शासित प्रदेश के दायरे में लिया गया है, और लद्दाख को भी एक अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया है। अब घाटी में वे सभी संविधान एवं नियम लागू होंगे जो कि देश के सभी राज्यों में लागू होते हैं। निश्चित ही यह फैसला घाटी वासियों को फायदा पहुंचाया। जम्मू कश्मीर की सूरत बदल जाएगी।
हमारा भारत 1947 में आजाद हुआ और उसी के साथ देश में बहुत बड़ा विवाद सामने आया जम्मू और कश्मीर को लेकर। जब देश आजाद हुआ तब भारत 565 खंडों में विभाजित था। यह सब छोटे-छोटे रियासते रियासते रियासते हुआ करते थे। आजादी के दौरान पाकिस्तान का निर्माण हुआ एक अलग देश के तौर पर में। आजादी के बाद सभी रियासतों के सामने तीन प्रावधान रखे गए, पहला आप भारत में मिल जाए दूसरा पाकिस्तान में मिल जाए और तीसरा आप स्वतंत्र रहे यानी सबसे अलग रहे। सभी रियासतें भारत में शामिल हो गए सिर्फ जम्मू-कश्मीर को छोड़कर क्योंकि वे एक अलग देश बनकर रहना चाहते थे। उस समय वहां के राजा हरि सिंह थे। पाकिस्तान चाह रहा था कि जम्मू-कश्मीर मुझ में मिल जाए, जब उनका यह योजना काम नहीं किया तो उन्होंने अपने कबालियो को भेजकर वहां हमला कर दिया। जिस पर महाराजा हरि सिंह ने भारत में विलय सिंह ने भारत में विलय महाराजा हरि सिंह ने भारत में विलय सिंह ने भारत में विलय ने भारत में विलय करना मुनासिब समझा। 1949 में घाटी में एक अनुच्छेद लागू किया गया, जिसके खिलाफ खुद बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर साहेब साहेब भीमराव अंबेडकर ने भी बोला था। उस समय उस अनुच्छेद में यह था कि जम्मू और कश्मीर को एक विशेष राज्य का दर्जा मिले और भारत सरकार को घाटी में सिर्फ सुरक्षा विदेशी मामले और संचार पर ही अनुमति होंगी। इसके अलावा केंद्र की कोई भी संविधान वहां लागू नहीं होगा, जब तक वहां के विधानसभा से पारित कर दें। 1954 में इसी अनुच्छेद के तहत एक और धारा जोड़ी गई धारा 35 ए जिसमें खासकर वहां की नागरिकता को लेकर ध्यान दिया गया था। उसी समय से इस अनुच्छेद का विरोध होने लगा था और उस समय कांग्रेस के कैबिनेट मंत्री डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने श्यामा प्रसाद प्रसाद मंत्री डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने खुलकर इसका विरोध किया। इसके लिए बड़े स्तर पर आंदोलन किये, उनका नारा था "एक देश एक विधान एक प्रधान" जिसके लिए उन्होंने अपनी प्राण न्योछावर कर दी थी। 2019 में जब भाजपा की देश में वापसी हुई तो अपनी घोषणा पत्र के मुताबिक इस अनुच्छेद को खत्म करने को लेकर कदम उठाया। किसी ने सच ही कहा कि सब्र का फल मीठा होता है लेकिन यह सब्र का फल यहां तक जाएगी किसी को नहीं पता था। अब कश्मीर एक आम राज्य की तरह हो गया है, हां एक बात की जम्मू और कश्मीर को राज्य के साथ-साथ केंद्र शासित प्रदेश के दायरे में लिया गया है, और लद्दाख को भी एक अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया है। अब घाटी में वे सभी संविधान एवं नियम लागू होंगे जो कि देश के सभी राज्यों में लागू होते हैं। निश्चित ही यह फैसला घाटी वासियों को फायदा पहुंचाया। जम्मू कश्मीर की सूरत बदल जाएगी।
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