Wednesday, 14 June 2023

विपक्षी एकता की कठिन राह





देश में इन दिनों विपक्षी एकता का आधार काफी तेजी से मजबूत करने की कोशिश हो रही है। इस कवायद में विपक्षी दलों के बीच लगातार मीटिंग का दौर जारी है। विपक्षी एकता को मजबूत करने का जिम्मा बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने उठाया है, लेकिन इन सब के बीच सवाल पैदा होता है कि विपक्ष का चेहरा कौन होगा? इस सवाल से विपक्षी एकता की राह कठिन होती दिख रही है।


विपक्षी दल में शामिल कांग्रेस, टीएमसी, आप, बीआरएस, राजद, जेडीयू और अन्य पार्टियां भले ही इस वक्त मंच साझा कर रही हैं, लेकिन जब पीएम उम्मीदवार की बात आएगी, तो कई दलों के बीच आपसी मतभेद देखने को मिल सकती है। बीआरएस से केसीआर, टीएमसी से ममता बनर्जी और आप से केजरीवाल खुद को विपक्ष का चेहरा बनाने में जुटे हैं।


ऐसे में नीतीश कुमार के लिए काफी मुश्किल होगा कि सभी पार्टियों को किसी एक चेहरा पर मना लिया जाए। नीतीश कुमार भले ही कह रहे हो कि उन्हें पीएम उम्मीदवार बनने में कोई दिलचस्पी नहीं है, लेकिन वह खुद भी इस बात से सहमत नहीं हो सकते हैं।


इस वक्त विपक्षी पार्टियों के लिए बड़ी जीत होगी, अगर वे सब किसी एक चेहरा पर भरोसा जताए, लेकिन ऐसा संभव नहीं दिख रहा है। इसके पीछे कई कारण हैं। सबसे पहला कारण दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल, जो खुद को पीएम मोदी के खिलाफ टिप्पणी या बयानबाजी करने से नहीं रोकते हैं। इसके पीछे ये तर्क है कि वह खुद को एक राष्ट्रीय नेता के तौर पर पेश करना चाहते हैं। वहीं, दक्षिण भारत में केसीआर अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटे हैं, ऐसे में वह खुद के अलावा किसी और चेहरा पर सहमत नहीं हो सकते हैं।


इधर, बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, जो हमेशा से भाजपा और पीएम मोदी के खिलाफ 'एकला चलो' का नारा देती आई हैं, वे किसी हाल में भी अन्य चेहरा पर अपनी सहमति प्रदान नहीं कर सकती हैं। ऐसे में विकट परिस्थिति है कि विपक्ष कैसे एक होगा। फिलहाल विपक्ष को एक साथ और सर्वसम्मति से किसी एक चेहरा को अपनी की ओर से पेश करना चाहिए, जिससे लोगों का भरोसा जीता जाए और विपक्षी एकता का आधार मजबूत हो सके।


वहीं, विपक्ष को केंद्र सरकार के खिलाफ कोई बड़ा मुद्दा उठाने पर भी ध्यान देना चाहिए, जो इस वक्त विपक्षी दलों के पास नहीं है। आम जनता का भरोसा तभी जीता जा सकता है, जब विपक्ष किसी बड़े मुद्दे को उठाए और उसे लोगों के बीच ले जाए। विपक्ष का जनाधार तभी मजबूत हो सकता है, जब लोगों में केंद्र सरकार के खिलाफ वोट करने की प्रेरणा या भावना पैदा कर सके।


इन सबके बीच सरकार जिस तरह से आम मुद्दों पर काम कर रही है। उससे विपक्षी दलों के लिए लोगों का भरोसा जीतना काफी मुश्किल लग रहा है। ऐसे में विपक्ष का आधार मजबूत करने के साथ-साथ सर्वसम्मति से अपना एक चेहरा पेश करने की जरूरत है। अगर विपक्षी दल ऐसा कर लेती है, तो आने वाले लोकसभा चुनाव में केंद्र सरकार के सामने चुनौती पेश कर सकती है। हालांकि, इसके लिए पहले इन कमियों को दूर करने की आवश्यकता दिख रही है।

बचपन वाला सरस्वती पूजा

 सरस्वती पूजा, ये पर्व महज एक दिन का होता है, लेकिन इसकी तैयारी में महीने भर से जुट जाते थे। लोगों को इकट्ठा करना, चंदा के लिए पैसे जुटाना, ...