Saturday, 28 November 2020
क्या कृषि कानून की आड़ में किसानों के अधिकारों का हो रहा हनन?
Wednesday, 28 October 2020
क्या नीतीश कुमार दुबारा सत्ता में वापसी करेंगे?
इस बार बिहार विधानसभा चुनाव काफी दिलचस्प होने वाला हैं क्योंकि वर्तमान परिदृश्य में जहां एक तरफ एनडीए का चेहरा नीतीश कुमार सामने आए हैं। वहीं दूसरी ओर महागठबंधन की तरफ से तेजस्वी यादव ने मोर्चा संभाला हुआ है। अब यहां सबसे अहम बात यह है कि नीतीश कुमार का विरोध कई जगह जमकर किया जा रहा है, लेकिन वहीं अगर हम बीजेपी की बात करें तो उनका विरोध नहीं हो रहा है। इस बार एलजेपी एनडीए से अलग होकर चुनाव लड़ रही है, और वह बीजेपी के खिलाफ अपना उम्मीदवार नहीं उतारी हैं। बल्कि जेडीयू के ख़िलाफ़ उम्मीदवार मैदान में दिए हैं। नीतीश कुमार के लिए इस समय बिहार विधानसभा में सत्ता में वापसी करना थोड़ा मुश्किल साबित हो सकता है। मुश्किल साबित इसलिए हो सकता है, क्योंकि इस बार समीकरण बहुत बदला हुआ हुआ समीकरण बहुत बदला हुआ हुआ है।एलजेपी सीधे तौर पर नीतीश कुमार को नुकसान पहुंचाने में लगी है। वहीं वह बिजेपी के समर्थन में है।
महागठबंधन की तरफ से तेजस्वी यादव उन्हें नुकसान पहुंचाने में लगा है। परंतु नीतीश कुमार के लिए खास बात यह है कि महागठबंधन के पास नीतीश जैसा चेहरा नहीं है। तेजस्वी यादव पर लोग भरोसा इसलिए नहीं दिखाना चाहते हैं, क्योंकि उनके पिता लालू प्रसाद यादव चारा घोटाले के अंतर्गत जेल में है। जिस वजह से लोगों को डर है कि, अगर तेजस्वी यादव सरकार बनाती है, तो फिर से जंगलराज वाला सिस्टम बिहार में लागू हो जाएगा। हालांकि तेजस्वी यादव युवाओं को लुभाने की कोशिश में लगे हुए हैं। कुल मिलाकर बात करे तो नीतीश कुमार फिर से सत्ता में वापसी करेंगे।
हमें जारी रखनी होगी कुपोषण के ख़िलाफ़ लड़ाई।
हमें आजादी मिले हुए 74 साल हो गए लेकिन आज तक हम कुपोषण से आजाद नहीं हो पाए हैं। कुपोषण से आज भी भारत लड़ाई लड़ रहा है। कुपोषण एक ऐसी बीमारी है जिससे आजादी मिलना बेहद जरूरी है। भारत के प्रधानमंत्री कुपोषण पर जीत पाने के लिए कई सारे कार्यक्रम चला रहे हैं। दुनिया भर में 70 करोड़ बच्चे कुपोषण का शिकार है। भारत की स्थिति बेहद चिंताजनक है। यूनिसेफ ने एक आंकड़ा जारी जारी करते हुए कहा है कि 5 वर्ष से कम उम्र वाले 14.9 करोड बच्चें अविकसित है। आईसीएमआर के एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में मरने वाले बच्चों की संख्या में से 68.2% बच्चे कुपोषण के कारण से मर रहा है।
कुछ दिन पहले जारी वैश्विक भुखमरी सूचकांक, 2020 में भारत को 107 देशों की सुची में 94वें स्थान पर दिखाया गया है। जिसमें भारत को श्रीलंका, नेपाल, पाकिस्तान, बांग्लादेश जैसे देशों से ख़राब हालत दिखाए थे।इसलिए जमकर इसपर विवाद हो रहा है। 107 देशों की सूची में भारत से मात्र 13 देश ही पीछे है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत की 14 प्रतिशत आबादी अल्पपोषित है तथा बच्चों में बौनेपन की दर 37.4 प्रतिशत है।
कुपोषण से बचने के लिए झारखंड सरकार के द्वारा एक अभियान चलाया जा रहा है जिसका नाम है पोषण वाटिका। इस अभियान की अगुवाई मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन खुद कर रहे हैं। इस अभियान के अंतर्गत एक महीने के भीतर राज्य में सखी मंडलों के जरिये 25 हजार से अधिक जागरुकता अभियान चलाया गया। इस पोषण वाटिका अभियान को शुरू करने के लिए जेएसएलपीएस (झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी, ग्रामीण विकास विभाग) ने जोर दिया है। अभियान के तहत ग्रामीण परिवार अपने घरों के पास खाली पड़े जगह पर पोषक सब्जियों, फलों के पौधे लगायें, इसके लिये उन्हें तैयार किया जा रहा है। इससे उन्हें सालों भर अपने घर की ही वाटिका से पोषण आहार मिले,जिससे कुपोषण के खिलाफ लड़ाई लड़ी जा सकें।
Sunday, 16 August 2020
तुम्हारा आना कुछ खास नहीं था, लेकिन तुम्हारा जाना कोई भुला नहीं पायेगा...
माही....माही मार रहा है... अब ये सुनने को नहीं मिलेगा...
माही सिर्फ क्रिकेट से सन्यास नहीं लिया है....बल्कि उन्होंने तो.....एक युग का अंत किया है....
आज भी मुझे याद है...बचपन में जब मैं तीसरी कक्षा में था......तो एक क्रिकेटर का फोटो 5 रुपया वाला कॉपी पर हुआ करता था......महीने में 5 से 7 कॉपियां खरीदता था ताकि उस फ़ोटो को निकाल कर अपने पास रख सकूं....
उसके लंबे लंबे बाल थे....और नाम था धोनी.... महेंद्र सिंह धोनी... उस समय क्रिकेट का C तक मुझे नहीं पता था...लेकिन धोनी का मतलब पता था....
सच बताऊं तो मैं बहुत मतलबी था...मतलबी इसलिए था कि मुझे सिर्फ धोनी से लगाव था... मैं सिर्फ यही चाहता था कि क्रिकेट का पूरा ओवर धोनी क्रीज़ पर डटें रहें....
जब माही खेल रहा होता था....तो मैं सब कुछ भूल कर उसे ही देखता था.... पता नहीं माही से कुछ अलग ही लेवल का लगाव है....
धोनी मने क्रिकेट....
धोनी मने धैर्य
धोनी मने साहस
धोनी का मतलब everything is पॉसिबल...
कहते है....कि जो लीजेंड होते है उनका स्टाइल की ग़जब होता है.... रन ऑउट से क्रिकेट की शुरुआत और रन ऑउट से ही क्रिकेट का अंत..... इस दोनों रन ऑउट के बीच फर्क बस इतना है कि जब पहली बार रन आउट हुआ था.....तो खुद निराश हुए थे....और जब अंतिम बार रन आउट हुए तो....पूरा देश रो रहा था.....
मुझे लगता है संघर्ष शब्द की पर्यायवाची में एक नया शब्द जुड़ गया है जो है,"धोनी".
माही को मैं अपने शब्दों के ज़रिए बयां करूँ यह सम्भव ही नहीं है.....
अंत में ये 4 पंक्ति....
तुम्हारा आना कुछ खास नहीं था.....
लेकिन तुम्हारा जाना कोई भुला नहीं पायेगा...
कैसे तुमने संघर्ष के बल पर इतिहास रच डाला...
और कैसे तुमने कैप्टन कूल बनकर दुनिया को हिला डाला....
माही....तुम हमेशा दिल में रहोगे.... लव यू माही... मिस यु माही..
Saturday, 8 August 2020
हमारे जीवन में सोशल मीडिया का महत्व।। Importance of Social Media in our life.
दुनिया में शायद ही कोई इंसान होगा जिसे अकेला रहना पसंद हो। बहुत ही कम ऐसे लोग होंगे जो खुद को दुनिया में होने वाली गतिविधियों से दूर रखते हो। फ़िलहाल जो वर्तमान में हालात है, ऐसे हालात में तो लोग काफी ज्यादा ख़ुद को लोगों के बीच में देखना चाहते हैं। कोविड19 और लॉकडाउन जैसी परिस्थितियों में हम सब अलग-अलग रह रहे हैं। इस दौरान न हम किसी से मिल सकते है और न ही किसी के साथ घूम सकते है। ऐसे में ख़ुद को अकेलेपन से दूर करने के लिए हम अपने कामों में उलझे रहते है। इस अकेलेपन को दूर करने के लिए हमारे पास एक बेहतरीन हथियार है और वो है 'सोशल मीडिया'। सोशल मीडिया वह तकनीक है जिसके जरिये हम अपने परिवार वालों के साथ वक़्त ज़ाया कर सकते है। यह वह होटल व रेस्टूरेंट है जहां हम अपने चाहने वालों के साथ बात कर सकते है। इन दिनों सोशल मीडिया एक मात्र उपाय है ख़ुद को अकेलेपन से दूर रखने का। इसके जरिये आज कल तो सभी काम भी किया जा रहा है। जबसे लॉकडाउन लागू हुआ है तथा सब कुछ बन्द हो गया है। ऐसे वक्त में सोशल मीडिया वह तकनीक है जिसके जरिये हम अपने कामों को कर रहें है। आज कल सभी स्कूल, कॉलेज, शिक्षण संस्थान, कोचिंग सब के सब ऑनलाइन वर्ग संचालन कर रहे हैं। लोगों को अभी वर्क फ्रॉम होम की सुविधा मिली है तथा वर्क फ्रॉम होम इसी सोशल मीडिया के ज़रिए सम्पन्न किया जा रहा है।
सोशल मीडिया समाज के सामाजिक विकास में अपनी अहम भूमिका निभाता है और इन दिनों तो कई व्यवसायों को बढ़ाने में भी मदद कर रहा है। यह सोशल मीडिया, मार्केटिंग जैसे साधन प्रदान करता है जो लाखों सशक्त ग्राहकों तक पहुंचता है। हम आसानी से सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी और समाचार प्राप्त कर सकते हैं। केपीएमजी के एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में इंटरनेट की पकड़ कुल आबादी का 31 प्रतिशत है यानि कि देश में 40 करोड़ से अधिक लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं जो 2021 तक बढ़कर 73 करोड़ से अधिक होने की सम्भावना जताई जा रही है। इसी तरह देश में वर्तमान में 29 करोड़ स्मार्टफोन यूजर हैं। अनुमान है कि 2021 तक 18 करोड़ और नये यूजर जुड़ जाएंगे। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत में 993 विश्वविद्यालय, करीब 40 हजार कॉलेज हैं और 385 निजी विश्वविद्यालय हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि सोशल मीडिया की क्या महत्वत्ता है हमारे जीवन में। अगर लॉकडाउन के दौरान देखा जाए तो सोशल मीडिया से लोगों को काफ़ी ज्यादा मदद मिली है तथा लोगों का काम सुलभ हुआ है। ऐसा कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि सोशल मीडिया इन दिनों हमारे जीवन में खुशहाली लाया है।
#हमारे जीवन में सोशल मीडिया का महत्व।।
#Importance of Social Media in our life.
Monday, 13 July 2020
भारत एक कृषि प्रधान देश सच या झूठ?
भारत को कृषि प्रधान देश कहा जाता है। कई दशक पहले देश के अधिकांश भागों में खेती का काम किया जाता था। उस समय लोग इतने आधुनिक नहीं थे और न ही लोगों के पास आज जैसे कोई आधुनिक उपकरण थे फिर भी किसान खुद से मिट्टी को चीर कर खेती करते थे। चूँकि हमारा देश उस वक़्त बहुत ज्यादा विकसित नहीं था इसलिए अधिकतर लोग कृषि पर निर्भर रहते थे। इस मिट्टी को अपना सर्वस्व मान कर इससे ज़िंदगी व्यतीत करते थे। उस समय कुछ कवियों के द्वारा एक किसान को स्वंय भगवान का रूप कहा गया है क्योंकि हमारा अन्नदाता खेत में काम करने वाला एक किसान है इसलिए उन्हें भगवान कहा गया। जैसे-जैसे देश में आधुनिकता को बढ़ावा मिला, नए नए रोजगार आए। नई-नई तकनीक आईं लोगों की रुचि कृषि की तरफ कम होने लगी तथा लोग दूसरे काम धंधो में लग गए। पिछली जनगणना के अनुसार हमारे देश में प्रतिदिन करीब 2200 लोग किसानी छोड़ रहे है। हाँ कृषि की तरफ उनका झुकाव कम होने का एक कारण यह भी है कि उन्हें अच्छी लागत नहीं मिलती है। ना ही उन्हें ज्यादा मदद मिलती है।
लेकिन वर्तमान समय में जब कोरोना वायरस के कारण देश में लॉकडाउन लगाया गया। काफी संख्या में लोग पलायन करने पर विवश हो गए तथा फिर से अपनी जन्मभूमि की ओर निकल पड़े। ताजा आंकड़े के मुताबिक उत्तर प्रदेश, बिहार,मध्यप्रदेश, राजस्थान में लाखों की तादाद में लोग अपने घर लौटे है। जिसमे मजदूर वर्ग के लोगों की संख्या काफी ज्यादा है। इससे उन लोगों में कृषि की तरफ झुकाव होने की स्थिति बन सकती है। क्योंकि कहीं न कहीं इन लोगों की रुचि कृषि क्षेत्र में ज्यादा हो सकती है। मुझे तो पूर्ण विश्वास है कि फिर से हमारे देश में कृषकों की संख्या में वृद्धि होगी।
Thursday, 4 June 2020
कोरोना के बीच सामने आए मानवीय मूल्य
इस संगठन की स्थापना 2015 में मिथिला क्षेत्र में शिक्षा प्रणाली, रोजगार, प्रवास के मुद्दों, साक्षरता, स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति और लघु उद्योगों की कमी को सुधारने के लिए की गई थी। आज इसकी सदस्यों की संख्या लाखों में है। यूँ तो इसका केंद्र मिथिला में विकास को लेकर है परंतु किसी भी आपदा के वक़्त यह पूरे बिहार के लिए खड़े रहते है। बिहार में जब भी विपत्ति पड़ी है यह तन मन धन से सामने आया है। 2017,2018,2019 में बाढ़ पीड़ितों को बचाने से लेकर उनके रहने खाने तक का इन्तजाम किया था, वहीं पिछले साल जब बिहार की राजधानी पटना पानी में समा गया था उस वक़्त भी यह लोगों की मदद के लिए आगे आया था। बिहार में चमकी बुखार के समय भी यही संगठन खड़ा था।
आज एक बार फिर जब पूरी दुनिया कोरोना वायरस जैसे महामारी से लड़ रही है तब इस समय भी इसके द्वारा लोगों को अत्यधिक मदद पहुंचाया जा रहा है। अपितु बिहार से लेकर दिल्ली तक संगठन के द्वारा भोजन,मास्क, या जरूरत के समान उपलब्ध करा रहें है। दिल्ली तथा बिहार में करीब 40 दिनों तक 300 से 400 लोगों को दिन-रात भोजन कराया जा रहा था अगर मैं सच कहूं तो ऐसे नेक कार्य करने के बाद बड़ा ही आनंद महसूस होता है। इस वक़्त ये लोग अपनी जान की परवाह किये बगैर ही घर घर जा कर लोगो की मदद कर रहे है यह काफी अतुलनीय हैं।
Saturday, 30 May 2020
ये मिट्टी तुम्हे पुकार रही है
ये मिट्टी तुम्हे पुकार रही है, क्योंकि तुम हो विदेशों में रहते,
हम तो मजदूर है, हम रहेंगे ऐसे ही पलायन करते!!
तुम्हीं हो दाता-दिनकर तुम्हीं हो सच्चे देशभक्त,
हम भी निकले से घर से की बनेंगे अच्छे देशभक्त!!
तुम्हें लाने सरकार उड़ाए हवाई जहाज,
हमें छोड़ दिया है पलायन करने,
पता नहीं अभी भी कितने भूखे मजदूर,
सो रहे है पटरियों पर मरने!!
जिस हवाई पट्टी पर लैंड करता है तुम्हारे विमान,
उसे कभी बनाये थे हम मजदूर,
आज हम भूखे पेट सड़को पर चल रहे है,
कर दिये हो तुम हमें मजबूर!!
अच्छे दिन का सपना दिखाने, बन कर आये थे व्यापारी,
अच्छे दिन आयेंगे बोलकर, बदले में दिए हो बेरोजगारी!!
अब कितना कहूँ, कितना लिखूं,
हे माई बाप अब तो सुन लो मेरी आवाज-2!!
Saturday, 9 May 2020
भारत में बेरोजगारी दर में बढ़ोतरी।
एक तरफ जहां पूरे देश में कोरोनावायरस का संकट बढ़ता जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ इससे बचाव के लिए सरकार द्वारा देशभर में लॉकडाऊन लगाया गया है। परंतु कोरोना से तो शायद हम बच जाएंगे लेकिन देश में बढती बेरोजगारी से कैसे बचें? सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी (CMIE) ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में बताया है कि देशभर में बेरोज़गारी दर बढ़कर 23% हो गयी है।
इस रिपोर्ट के मुताबिक बढ़ती बेरोज़गारी चिंता का विषय है। हमारे सामने स्पष्ट उदाहरण है कि कैसे कोरोना वायरस के शुरू होने के साथ ही अनिश्चितता के इस माहौल में लाखों मज़दूरों का पलायन हो रहा है। लॉकडाऊन के दौर में ठप्प पड़ी अर्थव्यवस्था की वजह से लाखों लोगों का रोजगार छिन गया है तथा इस वजह से लाखों परिवार बेघर हो गए है तथा सड़क पर आ गए है। लॉकडाउन के शुरुआती दिनों में ऐसा अनुमान लगाया जा रहा था कि, भारत के अर्थव्यवस्था पर इसका खास असर नहीं पड़ेगा, परन्तु एक बार फिर CMIE के रिपोर्ट आने के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बुरी ख़बर साबित हो सकती है। हालांकि लाइव मिंट ने अपनी एक लेख में इस बात की पुष्टि की है कि बेरोजगारी दर भारत ही नहीं दुनियाभर में तेजी से बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि ऐसे में लॉकडाउन खत्म होने के बाद बेरोजगारी दर कितनी बढ़ेगी इसका अनुमान लगाना कठिन है तथा संकट लम्बा चला तो रोज़गार का संकट और बढ़ेगा।
Friday, 17 April 2020
कोरोना से लड़ रहे है कई योद्धा
कोरोना वायरस महामारी के बीच सरकार द्वारा लोगों की मदद के लिए हर सम्भव प्रयास की जा रही है। ऐसे में कई सारे लोग/संस्था है जो मदद के लिए आगें आये है। आज हम बात कर रहे है ऐसे ही एक छात्र संगठन के बारे में जिसने इस महामारी में न केवल लोगो की मदद की बल्कि उनके साथ खड़े है। मिथिला स्टूडेंट यूनियन के लोगों के द्वारा पिछले कई दिनों से लोगों के बीच खाना, मास्क आदि का वितरण किया जा रहा है साथ ही ये लोग, लोगों को इसके प्रति जागरूक भी कर रहे है। इनलोगो के द्वारा गांव-गांव जा कर लोगो को कोरोना से बचने के उपाय बताए जा रहे है।
इस नेक कार्य के बीच ये लोग सरकार के द्वारा जारी दिशा निर्देश का पालन भी कर रहे है तथा सोशल डिस्टेंस का ख्याल भी रख रहे है। इनलोगो के द्वारा चलाये जा रहे इस अभियान के तहत ग्रामीण इलाके में लोग काफी जागरूक हुए है क्योंकि गांव की बात करे तो वहां लोगों में जागरूकता की कमी देखी जाती है ऐसे में ये लोग घर घर जा कर उन्हें कोरोना के बारे में बताते है तथा खुद को इस बीमारी से कैसे बचाये यह भी बताते है। ऐसे में ये लोगो खुद की सुरक्षा का भी ख्याल रखते है। इस वक़्त ये लोग अपनी जान की परवाह किये बगैर ही घर घर जा कर लोगो की मदद कर रहे है यह काफी अतुलनीय हैं।
Wednesday, 1 April 2020
इस भीड़ में कोई अपना छूट रहा
आज पूरी दुनिया महामारी से जूझ रही है। ऐसे में भारत पर भी गहरा असर पड़ा है और पूरा देश घरों में कैद है। इन सबके बीच कोई है जो हम सब की रक्षा,खाने की इंतजाम, रहने की व्यवस्था कर रहे है। जिसे हम सब डॉक्टर्स नर्सिंग कर्मियों, पुलिस कर्मियों,रक्षा सेवा कर्मियों,स्वयंसेवक संस्थाओं और अन्य अनिवार्य सेवा मे लगे लोगों के तौर पर जानते है परन्तु क्या हमने कभी सोचा है कि इनकी एक मांग पर सारी सुविधाएं सरकार द्वारा तुरंत पूरी कर दी जाती है। वह ज़रिया क्या है? कौन है वे लोग जो ऐसे विपदा में भी बिना रुकावट के सारी योजनाओं को सफल बनाने में दिन रात लगे है?
इस वक़्त जब हम सभी अपने घरों में बंद है, तब क्या कभी हमने सोचा है कि उनके खाते में , सरकारी खाते में , सरकारी सेवा कर्मियों के खाते में, सेवा आपूर्ति करने वाले के खाते में पैसा कैसे बराबर आ रहा हैं , कौन इसे सुचारू रूप से संचालित कर रहे हैं, जिससे सरकारी तंत्र और व्यवस्था सुचारु रूप से चल रही है।
किसी भी आपदा के घड़ी में, यें लोग सक्रियता से सभी मूलभूत एवं आवश्यक सुविधाएं बहाल करने के लिए भुगतान का कार्य करते है , लेकिन उनका उल्लेख कभी नहीं होता। एक कर्तव्यनिष्ठ नागरिक होने के नाते हमारा यह कर्तव्य है कि ऐसे लोगों का हम भी ख़्याल रखें जो हमारे देश का ख़्याल रखें है।
© Dev choudhary
Tuesday, 31 March 2020
भारतीय अर्थव्यवस्था पर कोरोना वायरस का क्या प्रभाव पड़ेगा?
आज पूरा विश्व कोरोना वायरस (COVID-19) से परेशान है, और सभी देशों की अर्थव्यवस्था की कमर टूट चुकी है। ऐसे में पहले से मुश्किलें झेल रही भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कोरोना वायरस का हमला एक बड़ी मुसीबत लेकर आया है. पिछले एक साल से ऑटोमोबाइल सेक्टर, रियल स्टेट, लघु उद्योग समेत असंगठित क्षेत्र में सुस्ती छाई हुई थी. बैंक एनपीए की समस्या से अब तक निपट रहे हैं. सरकार निवेश के ज़रिए, नियमों में राहत और आर्थिक मदद देकर अर्थव्यवस्था को रफ़्तार देने की कोशिश कर रही थी. लेकिन, इस बीच कोरोना वायरस के चलते पैदा हुए हालात ने जैसे अर्थव्यवस्था का पहिया जाम कर दिया है. ना तो कहीं उत्पादन है और ना मांग, लोग घरों में हैं और दुकानों पर ताले लगे हैं.
अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पुअर्स ने एक अप्रैल से शुरू हो रहे वित्तीय वर्ष (2020-21) के लिए भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के वृद्धि दर अनुमान को घटाकर 5.2 प्रतिशत कर दिया गया है. ऐजेंसी के मुताबिक़, एशिया-प्रशांत क्षेत्र को कोविड-19 से क़रीब 620 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है.
सरकार ने लॉकडाउन की घोषणा कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए की है. इससे लोग अपने घरों में रहेंगे, सोशल डिस्टेंसिंग बनी रहेगी जिससे वायरस कम से कम फैलेगा.
अनुमान है कि लॉकडाउन का सबसे ज़्यादा असर अनौपचारिक क्षेत्र पर पड़ेगा और हमारी अर्थव्यवस्था का 50 प्रतिशत जीडीपी अनौपचारिक क्षेत्र से ही आता है. ये क्षेत्र लॉकडाउन के दौरान नहीं कर सकता है. वो कच्चा माल नहीं ख़रीद सकते, बनाया हुआ माल बाज़ार में नहीं बेच सकते तो उनकी कमाई बंद ही हो जाएगी.
एक अर्थशास्त्री की माने तो लॉकडाउन से लोग घर पर बैठेंगे, इससे कंपनियों में काम नहीं होगा और काम न होने से व्यापार कैसे होगा और अर्थव्यवस्था आगे कैसे बढ़ेगी. लोग जब घर पर बैठते हैं, टैक्सी बिज़नेस, होटल सेक्टर, रेस्टोरेंट्स, फ़िल्म, मल्टीप्लेक्स सभी प्रभावित होते हैं. जिस सर्विस के लिए लोगों को बाहर जाने की ज़रूरत पड़ती है उस पर बहुत गहरा असर पड़ेगा." इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइज़ेशन के मुताबिक कोरोना वायरस सिर्फ़ एक वैश्विक स्वास्थ्य संकट नहीं रहा, बल्कि ये एक बड़ा लेबर मार्केट और आर्थिक संकट भी बन गया है जो लोगों को बड़े पैमाने पर प्रभावित करेगा. इसके द्वारा लगाए गए अनुमान के अनुसार कोरोना वायरस की वजह से दुनियाभर में ढाई करोड़ नौकरियां ख़तरे में हैं. वहीं संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मेलन के अनुसार यह कहा गया है कि इस महामारी की वजह से विकासशील देशों के ऊपर गहरा प्रभाव पड़ेगा और अनुमान लगाया जा रहा है कि कई लाख करोड वैश्विक आय का नुकसान होगा। वहीं उन्होंने बताया कि चीन इस से बच सकता है इसलिए सम्भव है कि भारत भी इस मंदी से बच जाए।
© Dev choudhary
Reference:-
Economics times
BBC
Sunday, 16 February 2020
भड़ास_या_विरोध?
"मैं अरविंद केजरीवाल ईश्वर की शपथ लेता हूँ कि....." ये कुछ शब्द बोलते हैं अरविंद केजरीवाल संवैधानिक रूप से दिल्ली के तीसरी बार मुख्यमंत्री बने। केजरीवाल कांग्रेस की शीला दीक्षित के बाद दूसरे ऐसे व्यक्ति हैं जो तीसरी बार दिल्ली के मुख्यमंत्री बने हैं।
इस चुनाव के दरमियान बहुत कुछ देखने और सुनने को मिला। देश में प्रदर्शन का माहौल बना हुआ ,और उस समय देश की राजधानी में विधानसभा चुनाव होना, सभी राजनीतिक पार्टियों के लिए एक अवसर समान था। जिसमें कई पार्टियों ने अपनी तकदीर आजमाई परंतु समझने वाली बात यह है कि कुछ महीने पहले ही लोकसभा चुनाव में दिल्ली ने देश की सबसे बड़ी पार्टी भाजपा को 7 में से 7 सीटें दी थी। लेकिन विधानसभा चुनाव में भाजपा पिछले 22 वर्षों से सत्ता में आने के लिए राह देख रही है। हालांकि भाजपा को इस बार पिछली बार के मुकाबले पांच सीटें ज्यादा मिली हैं और विधायकों की संख्या बढ़कर 8 हो गई है।
वहीं अगर देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस की बात की जाए तो उसका हाल बेहद खराब है और दो बार से विधानसभा चुनाव सिर्फ नाम के लिए लड़ रही है। सही मायने में अगर बात की जाए तो दिल्ली की जनता ने पहले ही मन बना लिया था कि फिर से केजरीवाल।
चुनाव के बाद कुछ लोगों के द्वारा केजरीवाल पर आरोप लगाया जा रहा है कि उन्होंने सब कुछ फ्री कर दिया इसलिए चुनाव जीते हैं लेकिन सोचने वाली बात है कि अगर देश की राजधानी में जनता को मूलभूत सुविधाएं मिल रही है तो इसका विरोध आखिर क्यों किया जाए ?
अगर केजरीवाल के द्वारा फ्री की गई योजनाओं के बारे में बात की जाए तो सब के सब आम जनों को सीधे तौर पर प्रभावित करती है, बसों का किराया महिलाओं के लिए मुफ्त हो जाने से बचा हुआ पैसा उसके ही घरों में रहता है, पानी,बिजली,शिक्षा,चिकित्सा मुफ्त होने से आमजनों को बहुत सहूलियत मिली है।
बहुत से देशों में ऐसी मूलभूत सुविधाएं मुफ्त है तो क्यों ना हमारे देश में भी ऐसा हो? जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं वह शायद यह भूल रहे हैं कि अगर कोई दूसरी पार्टी भी सरकार बनाती तो उनका भी घोषणा पत्र कुछ इसी प्रकार का था।
Saturday, 4 January 2020
समाज vs जागरूकता?
नमस्कार मैं हूँ देव, आज एक कहानी आप सबके सामने लेकर आया हूँ जिसके जरिये मैंने कोशिश की है बिहार में पिछड़े वर्ग के लोग शिक्षित क्यों नहीं हो पाते है?
रोज की तरह डिनर के बाद व्हाट्सएप की दुनिया में घुसते ही उसका मैसेज आया और फिर बात होने लगी, चूंकि उसकी परीक्षा नजदीक है इसलिए मैंने पूछा," पढ़ाई कैसी चल रही है?" उसने बोली ठीक! फिर इधर उधर की बात शुरू ही हुई थी कि अचानक उसने मुझसे पूछी की," बिहार में पिछड़े वर्ग के लोगों की ऐसी स्थिति क्यों है?" (खास कर शिक्षा को लेकर) मैंने कुछ देर के लिए सोचा कि ये क्या बोल रही है! और फिर दुबारा यही प्रश्न पूछी। मैंने थोड़ा और जानने की कोशिश की तो पता चला कि इस सब के पीछे "जागरूकता" सबसे बड़ा कारण है। मैं पहला प्रश्न में उलझा ही था कि दूसरा प्रश्न फिर आ गया मेरे सामने, "ये लोग जागरूक क्यों नहीं है?" मैं मन ही मन सोच रहा था कि आज इसको क्या हो गया है! लेकिन कुछ भी हो बात तो पते की कर रही है। मैंने भी सोचा कि चलो इसका जबाव ढूंढने की कोशिश करता हूँ, और फिर लग गए कारण ढूंढने।
कुछ समय सोचने के बाद मैं आखिरकार एक बिंदु पर पहुंच ही गया। लोगों को जागरूकता के नाम पर जो मानव श्रृंखला, रैली, गांव चलो अभियान जैसे तमाम जो कोशिशें की जा रही है क्या इसका कुछ प्रभाव पड़ा है? लोगों को जागरूक करने के नाम पर हमारे बिहार में नीतीश बाबू तीसरे वर्ष मानव श्रृंखला का निर्माण कराने जा रहें है परंतु क्या उससे लोग जागरूक हुए है पिछले दो मानव श्रृंखला की निर्माण की बात करें तो उस के बावजूद भी बिहार में शराब की बिक्री हो ही रही है और लोग दहेज के नाम पर मोटा रकम ले ही रहे है। पिछले दो मानव श्रृंखला का निर्माण इन्ही दो चीजों पर लोगों को जागरूक करने को लेकर किया गया था। इस वर्ष भी मानव शृंखला नशामुक्ति व जल-जीवन- हरियाली के पक्ष में तथा सामाजिक कुरीति दहेज व बाल विवाह के खिलाफ होगी अब देखना होगा कि इसका प्रभाव लोगों के ऊपर क्या पड़ता है! खैर ये तो राजनीति की बात हुई। इस सब से हट कर हमारे समाज के लोगों का भी कुछ कर्तव्य बनता है कि जो लोग जागरूक नहीं है उन्हें हम जाकर जागरूक करें। हमारे समाज में मुखिया, सरपंच एवं वार्ड पार्षद जैसे लोग भी रहते है क्या उनलोगों को नहीं सोचना चाहिए कि हम सब पंचायत के लोगों को जागरूक करें? उनलोगों का काम सिर्फ सड़क बनवाने या नल जल योजना के तहत हर घर में नल का पानी पहुंचाने तक ही सीमित नहीं है। हमारे समाज में ऐसे लोग भी रहते है जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत नाम कर चुके होते है परंतु अपने समाज के लिए कितना कुछ कर पाते है? जो लोग बिहार और बिहार के लोगों का नाम रौशन करते है क्या उन्हें अपने समाज के लिए नहीं सोचना चाहिए? हम किसी दूसरे राज्य में जाकर बिहार के बारे में बोलते है परंतु अपनी समाज को सुधारने की तनिक भी कोशिश नहीं करते है। जिस समाज से हम निकले है क्या उस समाज में लोगों को जागरूक करने के लिए हम नहीं आ सकते है? मैं सिर्फ समाज के वरिष्ठ या शिक्षित लोगों की ही बात नहीं कर रहा हूँ बल्कि उनलोगों को खुद भी समझना चाहिये कि हमारी भूमिका समाज में क्या हो सकती है और आगे बढ़ना चाहिए।
ख़ैर उसको तो अपनी प्रश्न का सही जबाव नहीं मिल पाया बल्कि और भी कई सवाल खड़े हो गए। परन्तु हम सब को सोचना चाहिए और आगे आना चाहिए अपने समाज को बदलने के लिए, जागरूक करने के लिए क्योंकि "एक शिक्षित समाज के बिना हम बेहतर देश की कल्पना नहीं कर सकते हैं"
नोट:- अगर मैंने कहीं कुछ गलत लिखा हो तो आप अपना कीमती सुझाव दे सकते है।
!!धन्यवाद!!
देव चौधरी🖋️🖋️
Thursday, 2 January 2020
कौन है नताशा जिन्होंने हार्दिक को किया क्लीन बोल्ड?
20-20 की शुरुआत के दिन ही हार्दिक पांड्या बोल्ड हो गया....जी हाँ,, अब आप समझ गए होंगे कि मैं क्या कहना चाहता हूँ,,
अगर आप यहां पंड्या को अपनी कातिल आदाओं से बोल्ड करने वाली नताशा के बारे में जानने के लिए आये हैं तो बिल्कुल सही जगह पहुंचे है...तो ज्यादा बकैती न करते हुए शुरू करते है...!
बचपन वाला सरस्वती पूजा
सरस्वती पूजा, ये पर्व महज एक दिन का होता है, लेकिन इसकी तैयारी में महीने भर से जुट जाते थे। लोगों को इकट्ठा करना, चंदा के लिए पैसे जुटाना, ...
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आज का दिन बहुत ही पावन दिन है क्योंकि आज के दिन में दो महान महापुरुषों का जन्म हुआ है। एक ओर जहां सत्य और अहिंसा के मार्ग ...
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जब आप किसी गरिमामयी पद पर होते हैं तब आपको एक एक शब्द का चुनाव बड़े ही इत्मीनान से करना चाहिए। कुछ दिन पहले दिल्ली की स्वास्थ्य सेवा...
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जिस तरह से आज के दौर में सोशल मीडिया का दुरुपयोग बढ़ता जा रहा है,यह कहना गलत नहीं होगा कि आने वाले समय में यह काफी प्रभाव डालेगा...















