Sunday, 16 February 2020

भड़ास_या_विरोध?



     "मैं अरविंद केजरीवाल ईश्वर की शपथ लेता हूँ कि....."  ये कुछ शब्द बोलते हैं अरविंद केजरीवाल संवैधानिक रूप से दिल्ली के तीसरी बार मुख्यमंत्री बने। केजरीवाल कांग्रेस की शीला  दीक्षित के बाद दूसरे ऐसे व्यक्ति हैं जो तीसरी बार दिल्ली के मुख्यमंत्री बने हैं। 
              इस चुनाव के दरमियान बहुत कुछ देखने और सुनने को मिला। देश में प्रदर्शन का माहौल बना हुआ ,और उस समय देश की राजधानी में विधानसभा चुनाव होना, सभी राजनीतिक पार्टियों के लिए एक अवसर समान था। जिसमें कई पार्टियों ने अपनी तकदीर आजमाई परंतु समझने वाली बात यह है कि कुछ महीने पहले ही लोकसभा चुनाव में दिल्ली ने देश की सबसे बड़ी पार्टी भाजपा को 7 में से 7 सीटें दी थी। लेकिन विधानसभा चुनाव में भाजपा पिछले 22 वर्षों से सत्ता में आने के लिए राह देख रही है।  हालांकि भाजपा को इस बार पिछली बार के मुकाबले पांच सीटें ज्यादा मिली हैं और विधायकों की संख्या बढ़कर 8 हो गई  है।
            वहीं अगर देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस की बात की जाए तो उसका हाल बेहद खराब है और दो बार से विधानसभा चुनाव सिर्फ नाम के लिए लड़ रही है। सही मायने में अगर बात की जाए तो दिल्ली की जनता ने पहले ही मन बना लिया था कि फिर से केजरीवाल।
          चुनाव के बाद कुछ लोगों के द्वारा केजरीवाल पर आरोप लगाया जा रहा है कि उन्होंने सब कुछ फ्री कर दिया इसलिए चुनाव जीते हैं लेकिन सोचने वाली बात है कि अगर देश की राजधानी में जनता को मूलभूत सुविधाएं मिल रही है तो इसका विरोध आखिर क्यों किया जाए ?
           अगर केजरीवाल के द्वारा फ्री की गई योजनाओं के बारे में बात की जाए तो सब के सब आम जनों को सीधे तौर पर प्रभावित करती है, बसों का किराया महिलाओं के लिए मुफ्त हो जाने से बचा हुआ पैसा उसके ही घरों में रहता है, पानी,बिजली,शिक्षा,चिकित्सा मुफ्त होने से आमजनों को बहुत सहूलियत मिली है।
               बहुत से देशों में ऐसी मूलभूत सुविधाएं मुफ्त है तो क्यों ना हमारे देश में भी ऐसा हो? जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं वह शायद यह भूल रहे हैं कि अगर कोई दूसरी पार्टी भी सरकार बनाती तो उनका भी घोषणा पत्र कुछ इसी प्रकार का था।

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