Thursday, 4 August 2022

भारत 2024 तक अमेरिका को देगा टक्कर, अगले तीन वर्षों में 26 ग्रीन एक्सप्रेसवे का होगा निर्माण; दिल्ली से देहरादून का सफर होगा आसान

 


भारत अगले कुछ वर्षों में सड़क के मामले में दुनिया (World) को पीछे छोड़ देगा। आने वाले समय में भारत में सड़कों (Roads) की स्थिति इतनी अच्छी  हो जाएगी की, अमेरिका (America) को टक्कर देगा। 

केंद्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने बुधवार को राज्यसभा (RajyaSabha) में कहा कि केद्र सरकार अगले तीन वर्षों में 26 ग्रीन एक्सप्रेसवे (Green Expressway) बनाएगी और देश में सड़कों की स्थिति बेहतर होगी, जिससे हम 2024 तक अमेरिका की बराबरी कर लेंगे।

2024 तक अमेरिका की होगी बराबरी

गडकरी ने कहा,''प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के नेतृत्व में 2024 तक भारत की सड़कों का ढ़ांचा अमेरिका के बराबर हो जाएगा, मैं वादा करता हूं। हमारे पास फंड की कोई कमी नहीं है।''

फंड की नहीं है कोई कमी



उन्होंने कहा कि नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (National Highways Authority of India) के पास कोष (Fund) की कोई कमी नहीं है। गडकरी ने कहा कि एनएचएआई (NHAI) के पास फंड की स्थिति बेहतर है। 

एक साल में पांच लाख किलोमीटर सड़क निर्माण

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एनएचएआई एक साल में पांच लाख किलोमीटर सड़क बनाने की क्षमता रखती है। 

अगले तीन वर्षों में 26 ग्रीन एक्सप्रेसवे का होगा निर्माण

उन्होंने कहा,''हम अगले तीन वर्षों में 26 ग्रीन एक्सप्रेसवे बनाने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसके बन जाने से कोई भी दिल्ली से देहरादून (Delhi to Dehradun) और हरिद्वार से जयपुर (Haridwar to Jaipur) का सफर दो घंटे में तय कर सकता है। 

दूरी होगी कम, सफर होगा आसान

उन्होंने दावा किया कि एक्सप्रेसवे के बन जाने से दिल्ली से चंडीगढ़ की बीच की दूरी मात्र ढाई घंटे की रह जाएगी। साथ ही दिल्ली से अमतसर चार घंटे, देलगी से कटरा छह घंटे, दिल्ली से श्रीनगर आठ घंटे, दिल्ली से मुंबई 12 घंटे और चेन्नई से बेंगलुरु दो घंटे में पहुंचा जा सकता है।  

उन्होंने दावा किया कि जहां दिल्ली से मेरठ जाने में पहले लोगों को साढे चार घंटे तक का समय लगता था, वहीं अब यह दूरी घटकर मात्र 40 की मिनट की रह गयी है। 

उन्होंने कहा कि हम पूरे देश में सड़क अवसंरचना को बदलकर बेहतर बनाएंगे।


देव चौधरी

Thursday, 21 July 2022

द्रौपदी ने मुर्मू ने रचा इतिहास, राष्ट्रपति चुनाव में दर्ज की रिकॉर्ड जीत



द्रौपदी मुर्मू (64) देश की 15वीं राष्ट्रपति होंगी। वह इस पद पर पहुंचने वाली आदिवासी समाज की पहली नेता हैं।


श्रीमती मुर्मू ने राष्ट्रपति पद के चुनाव में विपक्ष के साझा उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को भारी अंतर से हराया। मतगणना के नतीजों के औपचारिक घोषणा  होने से पहले ही राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) उम्मीदवार श्रीमती मुर्मू ने विपक्षी उम्मीदवार के खिलाफ काफी बड़ी बढ़त बना ली थी और उन्हें देशभर से बधाईयां मिलनी शुरू हो गयी थीं।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत ने देश के सूदूर पूर्वी इलाके के एक गांव में पैदा एक आदिवासी महिला को 1.3 अरब की आबादी वाले विशाल लोकतंत्र के सर्वोच्च पद के लिए चुन कर आज एक इतिहास रचा है।


इस चुनाव में श्रीमती मुर्मू को राजग में शामिल दलों के अलावा कई विपक्षी दलों के सांसदों और विधायकों का भी समर्थन मिला। मतगणना के रुझानों से यह झलक मिली कि जनप्रतिनिधियों का उनकी पार्टी लाइन से ऊपर उठकर समर्थन मिला है।

प्रधानमंत्री मोदी ने पार्टी लाइन से ऊपर उठकर श्रीमती मुर्मू का समर्थन करने वाले सांसदों और विधायकों को धन्यवाद देते हुए ट्वीटर पर कहा,''उनकी जीत हमारे लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत है।''


श्री मोदी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने श्रीमती मुर्मू को जीत की बधाई देने वाले पहले लोगों में थे। दोनों नेताओं ने नयी दिल्ली में श्रीमती मुर्मू के निवास स्थान पर जाकर उन्हें पुष्प गुच्छ भेंट किया और जीत की बधाई दी।


विपक्ष के उम्मीदवार श्री सिन्हा ने मतगणना की अंतिम घोषणा से पहले ही श्रमती मुर्मू को जीत की बधाई दे दी थी।


श्रीमती मुर्मू का जीवन संघर्ष पथ से शिखर पर पहुंचने की उतार-चढ़ाव भरी एक यात्रा की कहानी है। उन्होंने मयूरभंज जिले के आदिवासी गांव में जन्म लेकर जीवन के प्रारंभिक संघर्षों के बीच पढ़ाई और सरकारी नौकरी की और अध्यापन कार्य किया। उनका राजनीतिक जीवन 90 के उत्तरार्ध में शुरू हुआ, जब उन्होंने भाजपा की सदस्यता ली और स्थानीय निकाय में पार्षद बनीं।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल 24 जुलाई को सम्पन्न हो रहा है। उनके बाद इस संवैधानिक पद और सेना के सर्वोच्च कमांडर का दायित्व श्रीमती मुर्मू के हाथ में होगा।

देव चौधरी

Tuesday, 21 June 2022

राष्ट्रपति चुनाव: भाजपा की चाल से विपक्ष का बुरा हाल

 



एक कहावत है: एक तीर से दो निशाने, लेकिन भाजपा इस कहावत को चरितार्थ करते हुए एक तीर से कई निशाने में बदल दी है। देखा जाय तो देशभर में असल मायने में भाजपा ही राजनीति कर रही है। भाजपा हमेशा से ऐसी चाल चलती आ रही है, जिससे चित और पट्ट दोनों अपने पाले में कर लेती है या करने का प्रयास करती है। 

 अभी राष्ट्रपति चुनाव के लिए विपक्ष की पार्टियों ने यूपीए के राष्ट्रपति उम्मीदवार के रूप में पूर्व केंद्रीय मंत्री और टीएमसी नेता यशवंत सिन्हा को चुना है, वहीं देश में सत्तारूढ़ दल भाजपा की अगुवाई में एनडीए ने झारखंड की पूर्व राज्यपाल और आदिवासी समाज की महिला नेता द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार बनाया है।

  एनडीए की ओर से सुश्री मुर्मू को राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार बनाये जाने के बाद छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा सहित देश के पश्चिमी और दक्षिणी क्षेत्र में आदिवासी समाज के नेताओं व पार्टियों के सामने धर्मसंकट पैदा हो गया है। 

  झारखंड और छत्तीसगढ़ में चूंकि विपक्षी दल की सरकार है, जहां अमूमन सभी नेता 'आदिवासी' पर राजनीति करते आये हैं, वहां उनलोगों के लिए 'आगे कुआं पीछे खाई' जैसी स्थिति पैदा हो गयी है, क्योंकि राजधर्म कहता है कि विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा का समर्थन करें एवं जल जंगल और जमीन की लड़ाई लड़ते आये, कर्तव्य कहता है कि द्रौपदी मुर्मू का समर्थन करें। 

 भाजपा ने एक ही चाल में अपने कई विपक्षी दलों को अपने पाले में लेने के लिए पासा फेंक दी हैं। इसके साथ ही इसी वर्ष गुजरात में विधानसभा चुनाव होने है, जहां अच्छे खासे आदिवासी मतदाता है, जिसे भी ध्यान में रखा गया है।

सुश्री मुर्मू राष्ट्रपति बनने के बाद देश में दूसरी महिला राष्ट्रपति और प्रथम आदिवासी राष्ट्रपति के रूप में जानी जाएंगी।

© देव चौधरी


Sunday, 29 May 2022

बिहार पर्यटन या कुछ स्थानों का प्रोमोशन!




 बिहार में पर्यटन की अपार संभावनाएं है, पिछले कुछ वर्षों में राज्य सरकार द्वारा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए गए हैं और यही वजह है कि राज्य में पर्यटकों की रूचि बढ़ी है। हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक बिहार में कम संसाधन होने के बावजूद विदेशी पर्यटकों की संख्या में 31 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। 

केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय की एक रिपोर्ट के अनुसार, बिहार देश के टॉप-10 राज्यों में नौवें स्थान पर है और विदेशी पर्यटकों की रूचि गोवा से अधिक बिहार में देखी गयी है, लेकिन राज्य सरकार द्वारा सिर्फ बिहार के कुछ भागों को ही प्रमोट किया जा रहा है। 

मैं वैसे क्षेत्रवाद में विश्वास नहीं रखता हूं, लेकिन सरकार द्वारा अपनाए जा रहे नीति को देखकर चोट पहुंचती है, क्योंकि उत्तर बिहार में कई ऐतिहासिक स्थल है, जिसे संरक्षित करने की आवश्यकता है लेकिन राज्य सरकार इसपर चुप्पी साधी हूई है। 


अगर उत्तर बिहार में सिर्फ मधुबनी, सीतामढ़ी और दरभंगा को देखा जाए तो वहां कई ऐतिहासिक स्थल है। वहां के गौरवशाली इतिहास को मिट्टी में मिलाने का प्रयास किया जा रहा है, दरभंगा किला, राजनगर किला या अन्य ऐतिहासिक स्थल ध्वस्त हो चुका है या ध्वस्त हो रहा है, लेकिन राज्य सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंगती है। बेगुसराय में सिमरिया घाट उत्तर बिहार के लोगों के लिए हरिद्वार के बराबर है लेकिन वहां की स्थिति और व्यवस्था देखकर रोना आता है, तीर्थ स्थल होने के बावजूद वहां ढंग से पीने की पानी की भी व्यवस्था नहीं है।

इसके अलावा अगर जमुई-मुंगेर तरफ की बात करें तो वहां भी कई ऐसितहासिक धरोहर है, जिसे संजोने की जरूरत है लेकिन सरकार को सिर्फ नालंदा, रोहतास, गया और इसके आस-पास के जिले नजर आते हैं।

मैं सरकार पर पक्षपात का आरोप नहीं लगा रहा हूं, लेकिन सवाल तो पक्षपात का ही उठता  है। 

मैंने बस कुछ ही जगहों के नाम बताएं हैं, ऐसे और भी कई ऐतिहासिक स्थल या धरोहर है जिसे संजोने की जरूरत है और पर्यटन के रूप में आगे बढ़ाने की आवश्यकता है लेकिन बिहार सरकार को सिर्फ कुछ ही जगहों पर पर्यटन स्थल नजर आती है।


देव चौधरी

Thursday, 12 May 2022

कौन हो तुम, तुम्हारा नाम क्या है? सुनो…कौन हो तुम?



कौन हो तुम, तुम्हारा नाम क्या है?

सुनो....कौन हो तुम?


 

अच्छा सुनो, तुम्हें देखकर ऐसा लग रहा जैसे जन्मों का रिश्ता हो तुमसे,

कुछ कहना है तुमसे, क्या तुम सुनोगी?

कुछ दिनों से मैं खिल सा उठा हूं, 

कुछ दिनों से मेरा काम में मन लगने लगा है।


कुछ दिन पहले जो शहर विरान लग रहा था,

आज उसमें एक रौनक सी दिख रही है।

मुझे तुमसे कुछ कहना है, लेकिन कह नहीं पा रहा,

डर है कि तुम उसे सुन सकोगी या नहीं।

मैं अब खुद से सवाल करता हूं, तो जवाब तुमसे मिलता है,

मैं अब खुद को ढूंढता हूं तो तुम्हें पाता हूं।


तुमसे बहुत कुछ पूछना है,

लेकिन ऐसा लग रहा कि सब मुझे पहले से ही पता है।

सुनो, कभी-कभी सोचता हूं कि ये क्या हो रहा है, 

फिर सोचता हूं कि जो हो रहा है अच्छा हो रहा है।

क्योंकि तुम्हें सोचकर मन खिल उठता है, एक अलग सुकून मिलता है।

सुनो कौन हो तुम, तुम्हारा नाम क्या है?



देव चौधरी



Thursday, 5 May 2022

मधुबनी के लोहट में बनेगी नयी चीनी मिलः शाहनवाज





नयी दिल्ली, 05 मई।। बिहार के उद्योग मंत्री सैयद शाहनवाज हुसैन ने गुरुवार को यहां कहा कि बिहार में बंद पड़ी चीनी मिल, जूट मिल और पेपर मिल को चालू कराने के लिए राज्य सरकार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि मधुबनी के लोहट में जहां चीनी मिल थी, जो अब बंद पड़ी है, वहां पर इथेनॉल प्लांट लगाया जाएगा। साथ ही वहां पर एक चीनी मिल भी स्थापित की जाएगी। 

उद्योग मंत्री ने कहा कि बंद पड़ी पेपर मिल को भी चालू कराने पर सरकार विचार कर रही है। उन्होंने अशोक पेपर मिल दरभंगा के बारे में बताया कि इस मिल का मामला जल्द ही हल होने वाला है।  

उन्होंने यूनीवार्ता द्वारा पूछे गए सवाल, बिहार में बंद पड़ी चीनी मिल, जूट मिल और पेपर मिल को पुनः चालू कराने के सवाल पर कहा,''बंद पड़ी चीनी मिल की जमीन पर इथेनॉल प्लांट लगाए जाएंगे। जूट मिल और पेपर मिल को लेकर भी सरकार विचार कर रही है।''

उन्होंने कहा,''मधुबनी के लोहट में चीनी मिल की जमीन पर इथेनॉल प्लांट के साथ-साथ वहां एक चीनी मिल भी बनाई जाएगी।''  

इसके साथ ही उन्होंने कहा,''अशोक पेपर मिल का भी मामला हल होने वाला है।''

श्री हुसैन ने कहा कि बिहार औद्योगिकीकरण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में पिछले एक साल में 555 औद्योगिक ईकाइयों की स्थापना के लिए 36 हजार 253 करोड़ रुपए के प्रस्ताव के निवेश आए हैं।


देव चौधरी

Monday, 2 May 2022

इक्कीसवीं सदी के भारत में सैकड़ों पुलिस स्टेशनों में नहीं है वाहन, टेलिफोन, वायरलेस सुविधा

 



इक्कीसवीं सदी के भारत में आज भी ऐसे कई पुलिस स्टेशन है, जहां मूलभूत सुविधाएं तक मौजूद नहीं है। हम तेजी से डिजिटल दुनिया की ओर कदम बढ़ा रहे हैं, देश-दुनिया में तेजी से बढ़ने के लिए एक से एक नया प्रयोग कर रहे हैं। वहीं, आज भी देश में कुछ राज्यों के पुलिस स्टेशनों में वाहन, टेलिफोन और वायरलेस/मोबाइल तक नहीं है। 

आज हम इतने आगे बढ़ चुके हैं कि एक फोन कॉल पर कोई भी वस्तु हमारे दरवाजे पर होती है, ऐसे में उन थानों की क्या स्थिति होगी, जहां ये सुविधाएं अभी तक पहुंची ही नहीं है। 

पुलिस-प्रशिक्षण, आधुनिकीकरण औऱ सुधार के लिए विभाग संबंधित गृह कार्य संबंधी संसदीय स्थायी समिति द्वारा सदन में पेश की गयी रिपोर्ट के अनुसार, देश में 257 पुलिस स्टेशनों में वाहन नहीं है, 638 पुलिस थानों में टेलिफोन नहीं है और 143 पुलिस थानों में वायरलेस/मोबाइल नहीं है। 

देश में इन पुलिस स्टेशनों में टेलिफोन या समुचित वायरलेस कनेक्टिविटि नहीं हैं, विशेष रूप से अरुणआचल प्रदेश, ओडिशा और पंजाब  जैसै संवेदनशील राज्यों में, खासकर इस तथ्य को देखते हुए इनमें से कुछ राज्यों को वर्ष 2018-19 में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए पुरस्कृत किया गया था। इसके अलावा, केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर काफी संवेदनशील सीमावर्ती संघ राज्य क्षेत्र में भी काफी संख्या में पुलिस स्टेशनों में टेलिफोन और वायरलेस सेट की सुविधा नहीं है। 

इसको लेकर समिति ने गृह मंत्रालय से सिफारिश करते हुए संबंधित राज्यों को तुरंत इस ओर कार्य करने के लिए सलाह दी है।


देव चौधरी

Sunday, 6 February 2022

भारत पर रूस का नया चाल, कश्मीर पर विवादों को दिया तूल


देश में भारत का अभिन्न अंग जम्मू कश्मीर को लेकर हमेशा से विवादों का दौर रहा है। अभी दो दिन पहले ही एक नया विवाद सामने आया है। जिससे कुछ दिनों के लिए उन सभी लोगों को बल मिल जाएगा या समर्थन मिल जाएगा, जो घाटी को लेकर हमेशा से देश के खिलाफ अपना रूख़ अख्तियार किए हुए रहते हैं।
बहरहाल मुद्दा पर आते हैं, रूस का एक डिजिटल मीडिया चैनल है 'रेडफिश मीडिया' जो ख़ुद को सामुदायिक मीडिया के तौर पर परिभाषित करता है। उन्होंने 04 फरवरी को जम्मू-कश्मीर पर अपनी आगामी डॉक्यूमेंट्री का एक ट्रेलर ट्वीटर पर रिलीज किया था और कहा कि यह 11 फरवरी को प्रसारित किया जाएगा। जिसका शीर्षक ‘कश्मीर: फिलिस्तीन इन द मेकिंग’ है। डॉक्यूमेंट्री में वास्तविक परिस्थिति से उलट तथ्यों को दिखाया गया है। यानी कि कश्मीर को लेकर नया बखेड़ा खड़ा किया गया है।
अब इस मुद्दे पर विवाद शुरू होते ही रूस ने खुद को अलग करते हुए कहा है कि इसमें दिखाए गए विचार से उसका कोई संबंध नहीं है।
भारत में रूस के दूतावास ने कहा, “रूसी राज्य-संबद्ध मीडिया” के रूप में भ्रामक नाम वाले इस चैनल के समर्थन से उसका कोई संबंध नहीं  है।”
बयान में कहा गया है कि, "चैनल अपनी संपादकीय नीति के संबंध में स्वतंत्र रूप से कार्य करता है।"
पिछले कुछ दिनों से रूस का रूख भारत के लिए बदला-बदला सा भी लग रहा है, जिसका जीता जागता उदाहरण बीजिंग में हो रहे विंटर ओलिम्पिक को लेकर देखा जा सकता है। तो क्या रूस द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भारत में इस तरह के प्रोपेगैंडा जानबूझकर फैलाया जा रहा है? क्या इसमें चीन और पाकिस्तान का हाथ है? जो भी हो, सरकार को रूस से इसको लेकर गम्भीरता से बात करनी चाहिए तथा ऐसे भ्रमित तथ्यों पर तत्काल रोक लगाया जाना चाहिए।


देव चौधरी

बचपन वाला सरस्वती पूजा

 सरस्वती पूजा, ये पर्व महज एक दिन का होता है, लेकिन इसकी तैयारी में महीने भर से जुट जाते थे। लोगों को इकट्ठा करना, चंदा के लिए पैसे जुटाना, ...