Thursday, 12 May 2022

कौन हो तुम, तुम्हारा नाम क्या है? सुनो…कौन हो तुम?



कौन हो तुम, तुम्हारा नाम क्या है?

सुनो....कौन हो तुम?


 

अच्छा सुनो, तुम्हें देखकर ऐसा लग रहा जैसे जन्मों का रिश्ता हो तुमसे,

कुछ कहना है तुमसे, क्या तुम सुनोगी?

कुछ दिनों से मैं खिल सा उठा हूं, 

कुछ दिनों से मेरा काम में मन लगने लगा है।


कुछ दिन पहले जो शहर विरान लग रहा था,

आज उसमें एक रौनक सी दिख रही है।

मुझे तुमसे कुछ कहना है, लेकिन कह नहीं पा रहा,

डर है कि तुम उसे सुन सकोगी या नहीं।

मैं अब खुद से सवाल करता हूं, तो जवाब तुमसे मिलता है,

मैं अब खुद को ढूंढता हूं तो तुम्हें पाता हूं।


तुमसे बहुत कुछ पूछना है,

लेकिन ऐसा लग रहा कि सब मुझे पहले से ही पता है।

सुनो, कभी-कभी सोचता हूं कि ये क्या हो रहा है, 

फिर सोचता हूं कि जो हो रहा है अच्छा हो रहा है।

क्योंकि तुम्हें सोचकर मन खिल उठता है, एक अलग सुकून मिलता है।

सुनो कौन हो तुम, तुम्हारा नाम क्या है?



देव चौधरी



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