Friday, 23 August 2019

मकरमपुर में कल होगा ध्वजारोहण.


बिहार, दरभंगा, बेनीपुर:- क्षेत्र के मकरमपुर गांव में भादव कृष्ण पक्ष नवमी को ध्वजारोहण का परंपरा रहा है, जो 24 अगस्त को ग्राम स्थित बजरंगबली मंदिर प्रांगण में हजारों की संख्या में भक्तों के द्वारा ध्वजारोहण किया जाएगा। इस दौरान यहां भक्तिमय माहौल रहता है। विभिन्न जगहों से श्रद्धालु यहां ध्वजा अर्पित करने पहुंचते हैं। जिस कारण से पूरे गांव में भीड़ का मंजर रहता है। यह मान्यता है कि कोई भक्त मनोकामना मांगता है, तो उसे पूरी हो जाने के बाद यहां ध्वजा अर्पण करना होता है। यूँ तो पूरे देश में रामनवमी को ध्वजारोहण होता है, लेकिन यहां की परंपरा कुछ अलग है। जिस कारण यहां भादव महीने में कृष्ण पक्ष नवमी को ध्वजारोहण होता है।
               आपको बता दें कि यहां का इतिहास बहुत पुराना रहा है ग्रामीण मोद नारायण चौधरी बताते हैं कि मकरमपुर गाँव के सभी मुल वासिन्दे जलेवार गरौल के हैं। गरौल जो अभी तारडीह प्रखंड में अवस्थित है ,यहाँ भुतकाल में अन्य धर्मावलंबियों से उपद्रव ग्रस्त होने के कारण वहाँ से अभी के गाँव मकरमपुर जो सर्वे के अनुसार परूषोत्तमपुर के नाम से जाना जाता है,यहां आकर बस गये, जो भादव कृष्ण नवमी का दिन था। उसी दिन महावीर जी का ध्वजारोहण किया गया।कालान्तर में दरभंगा महाराज से यहाँ का एक परिवार जो अभी बंगला घराना के नाम से जाना जाता है ,उनका हरीयठ मौजा को लेकर भीषण लडाई हुई जिसमें कानूनी ढंग से इनलोगों कि जीत हुई। इसी संदर्भ में ये लोग यह मनौती किये कि अगर हमारी जीत हुई तो दोहरी ध्वजा महावीर जी को देंगे। धीरे-धीरे इसका कई लोगो के द्वारा अनुसरण किया गया अौर लोग अपनी मनोकामना पुरा होने पर ध्वजा देने लगे । यहाँ भूत पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय ललित नारायण मिश्रा ,पं हरिनाथ मिश्र,पूर्व सांसद कृति झा आजाद तथा वर्तमान सांसद गोपाल जी ठाकुर सहित बहुत गणमान्य लोगों ने मनोकामना पुर्ण होने के उपरान्त ध्वजारोजण किया। यहाँ महावीर जी का मुख्य प्रसाद के रूप में चूड़ा -दही ,लड्डू ,केला ,मिठाई आदि का भोग लगाया जाता है तथा प्रत्येक ध्वजा पर तीन ब्राह्मण ,दो कुंवारी कन्या को प्रसाद भोजन कराया जाता है। इसका मुख्य पुजन बंगला परिवार के द्वारा करवाया जाता है। इस दिन यहां विभिन्न जिलों,प्रदेशों, शहर सहित पड़ोसी देश नेपाल के लोग हजारों की संख्या में ध्वजारोहण करते हैं तथा मनौति पुरा करते है।

Monday, 19 August 2019

जल संकट एक गम्भीर ख़तरा?


                आज जल संकट से हर कोई वाकिफ है जिस तरह से जल संकट बढ़ रही है वो आने वाले भविष्य के लिए अच्छा संकेत नही हैं। हमारी भारत ही नही दुनिया की हर तीसरी देश इस संकट से जूझ रही हैं। आने वाले दिनों में स्थिति और भी भयावह हो जाएगी। जिस तरह से हम लोग पानी को व्यर्थ समझ रहे है वह भविष्य में हमारे मानव जीवन के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं। हमारी सोच बदलनी होगी और पानी के महत्व को समझना होगा ताकि हमारी आने वाली पीढ़ी को पानी मिल सकें। पानी का सदुपयोग कैसे करें ये हमसब को गुजरात और राजस्थान से सीखना चाहिए, वहां पर बारिश की पानी का भंडारण किया जाता है और फिर इसे खेती के लिए उपयोग किया जाता हैं। जल संकट के कई सारे कारण है जैसे कि जनसंख्या, मुफ्त बिजली,प्रदूषण, बच्चो को पानी का महत्व न समझाना, ये सब कुछ कारण है अगर हमसब मिलकर इस पर ध्यान दे तो आने वाले समय मे जल संकट का खतरा कम हो सकता हैं।

                                              ©देवशंकर🖋️🖋️
                           devshanker.jimmc@gmail.com

Saturday, 10 August 2019

पाकिस्तान की बदहवासी आयी सामने!

                       "पाकिस्तान की बौखलाहट"   
   
          
          भारत सरकार के ऐतिहासिक कदम की चर्चा सभी ओर हो रहीं है। जिस तरह से भाजपा सरकार ने अपने घोषणा के मुताबिक सत्ता में वापसी करते ही जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और धारा 35 ए को खत्म कर दिया, उससे सभी चकित है। ख़ास कर अगर हम पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की बात करें तो समझेंगे की इस अनुच्छेद को हटाने से सबसे बड़ा झटका उसको ही लगा है। जिस तरह से पाकिस्तान ने भारतीय उच्चायुक्त को वापस भेजने का फैसला लिया और राजनीतिक सम्बन्धों को तोड़ रहे हैं उससे उसकी बौखलाहट साफ झलक रही हैं। जहां तक राजनायिक सम्बंध तोड़ने की बात है तो सभी को पता है कि भारत के सुरक्षा सलाहकार करीब एक अर्से से इसकी मांग कर रहें थे। इस बात पर भारत को तनिक भी चिंतनीय होने की जरूरत नहीं हैं।
                    अब ऐसा लगता हैं कि जिस तरह पाकिस्तान ने जल्दबाजी में यह कदम उठाया है वह उस पर ही कहीं भारी न पड़ जाये। पाकिस्तान जिस तरह से इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में उठाने की बात कर रहा है, शायद वह वाकिफ नहीं हैं कि इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र महज एक कागज का टुकड़ा हैं। पाकिस्तानी चाहे कुछ भी बोलें लेकिन सबको पता हैं कि इसका प्रभाव भारत पर तनिक भी नही पड़ेगा।

Friday, 9 August 2019

खाने को मत तौलो धर्म की तराजू पर!

                  "खाने को मत तौलो धर्म की तराजू पर"

                पूरे विश्व में भारत देश एक ऐसा देश है जहां सभी धर्मों को एक समान देखा जाता है। ऐसे में अगर भारत में खाने को लेकर धर्म पर सवाल उठता है इसे बड़ी निन्दनीय बात नहीं हो सकती हैं। जिस तरह से कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर एक डिलीवरी ब्वॉय से खाना लेने से पहले उसका धर्म जानने को लेकर मुद्दा गर्म हुआ था यह हमारे भारत की संस्कृति सभ्यता को चोट पहुंचाती दिखीं। उस आदमी ने धर्म जानने से पहले क्या यह नहीं सोचा कि यह अन्न कहां से आया, इसे किस धर्म के लोगों ने उपजाया होगा। एक ओर हम धरती से अंतरिक्ष तक अपना वर्चस्व कायम करने में लगे हैं और दूसरी ओर हम खाने को धर्म की तराजू में तौल रहे हैं। हमें खाने का अपमान करने से पहले एक पल के लिए यह जरूर सोचना चाहिए कि आज जिस खाने को अपमान कर रहे हैं वह खाना किसी-किसी को नसीब तक नहीं होता है।
               आजकल धर्म के नाम पर बहस छिड़ी हुई है जो हमारे भारत के लिए आहितकारी साबित हो सकते हैं क्योंकि भारत को आपसी भाईचारे के लिए जाना जाता है। भारत में खाने और पानी को लेकर जाति-धर्म की राजनीति नहीं करनी चाहिए। इस तरह की सोच रखने वाले भविष्य में भारत के लिए खतरा साबित हो सकते हैं।

एक देश एक विधान सपना हुआ साकार!

             "एक देश एक विधान सपना हुआ साकार"

             हमारा भारत 1947 में आजाद हुआ और उसी के साथ देश में बहुत बड़ा विवाद सामने आया जम्मू और कश्मीर को लेकर। जब देश आजाद हुआ तब भारत 565 खंडों में विभाजित था। यह सब छोटे-छोटे रियासते रियासते रियासते हुआ करते थे। आजादी के दौरान पाकिस्तान का निर्माण हुआ एक अलग देश के तौर पर में। आजादी के बाद सभी रियासतों के सामने तीन प्रावधान रखे गए, पहला आप भारत में मिल जाए दूसरा पाकिस्तान में मिल जाए और तीसरा आप स्वतंत्र रहे यानी सबसे अलग रहे। सभी रियासतें भारत में शामिल हो गए सिर्फ जम्मू-कश्मीर को छोड़कर क्योंकि वे एक अलग देश बनकर रहना चाहते थे। उस समय वहां के राजा हरि सिंह थे। पाकिस्तान चाह रहा था कि जम्मू-कश्मीर मुझ में मिल जाए, जब उनका यह योजना काम नहीं किया तो उन्होंने अपने कबालियो को भेजकर वहां हमला कर दिया। जिस पर महाराजा हरि सिंह ने भारत में विलय सिंह ने भारत में विलय महाराजा हरि सिंह ने भारत में विलय सिंह ने भारत में विलय ने भारत में विलय करना मुनासिब समझा। 1949 में घाटी में एक अनुच्छेद लागू किया गया, जिसके खिलाफ खुद बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर साहेब साहेब भीमराव अंबेडकर ने भी बोला था। उस समय उस अनुच्छेद में यह था कि जम्मू और कश्मीर को एक विशेष राज्य का दर्जा मिले और भारत सरकार को घाटी में सिर्फ सुरक्षा विदेशी मामले और संचार पर ही अनुमति होंगी। इसके अलावा केंद्र की कोई भी संविधान वहां लागू नहीं होगा, जब तक वहां के विधानसभा से पारित कर दें। 1954 में इसी अनुच्छेद के तहत एक और धारा जोड़ी गई धारा 35 ए जिसमें खासकर वहां की नागरिकता को लेकर ध्यान दिया गया था। उसी समय से इस अनुच्छेद का विरोध होने लगा था और उस समय कांग्रेस के कैबिनेट मंत्री डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने श्यामा प्रसाद प्रसाद मंत्री डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने खुलकर इसका विरोध किया। इसके लिए बड़े स्तर पर आंदोलन किये, उनका नारा था "एक देश एक विधान एक प्रधान" जिसके लिए उन्होंने अपनी प्राण न्योछावर कर दी थी। 2019 में जब भाजपा की देश में वापसी हुई तो अपनी घोषणा पत्र के मुताबिक इस अनुच्छेद को खत्म करने को लेकर कदम उठाया। किसी ने सच ही कहा कि सब्र का फल मीठा होता है लेकिन यह सब्र का फल यहां तक जाएगी किसी को नहीं पता था। अब कश्मीर एक आम राज्य की तरह हो गया है, हां एक बात की जम्मू और कश्मीर को राज्य के साथ-साथ केंद्र शासित प्रदेश के दायरे में लिया गया है, और लद्दाख को भी एक अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया है। अब घाटी में वे सभी संविधान एवं नियम लागू होंगे जो कि देश के सभी राज्यों में लागू होते हैं। निश्चित ही यह फैसला घाटी वासियों को फायदा पहुंचाया। जम्मू कश्मीर की सूरत बदल जाएगी।

बचपन वाला सरस्वती पूजा

 सरस्वती पूजा, ये पर्व महज एक दिन का होता है, लेकिन इसकी तैयारी में महीने भर से जुट जाते थे। लोगों को इकट्ठा करना, चंदा के लिए पैसे जुटाना, ...