बिहार में पर्यटन की अपार संभावनाएं है, पिछले कुछ वर्षों में राज्य सरकार द्वारा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए गए हैं और यही वजह है कि राज्य में पर्यटकों की रूचि बढ़ी है। हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक बिहार में कम संसाधन होने के बावजूद विदेशी पर्यटकों की संख्या में 31 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।
केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय की एक रिपोर्ट के अनुसार, बिहार देश के टॉप-10 राज्यों में नौवें स्थान पर है और विदेशी पर्यटकों की रूचि गोवा से अधिक बिहार में देखी गयी है, लेकिन राज्य सरकार द्वारा सिर्फ बिहार के कुछ भागों को ही प्रमोट किया जा रहा है।
मैं वैसे क्षेत्रवाद में विश्वास नहीं रखता हूं, लेकिन सरकार द्वारा अपनाए जा रहे नीति को देखकर चोट पहुंचती है, क्योंकि उत्तर बिहार में कई ऐतिहासिक स्थल है, जिसे संरक्षित करने की आवश्यकता है लेकिन राज्य सरकार इसपर चुप्पी साधी हूई है।
अगर उत्तर बिहार में सिर्फ मधुबनी, सीतामढ़ी और दरभंगा को देखा जाए तो वहां कई ऐतिहासिक स्थल है। वहां के गौरवशाली इतिहास को मिट्टी में मिलाने का प्रयास किया जा रहा है, दरभंगा किला, राजनगर किला या अन्य ऐतिहासिक स्थल ध्वस्त हो चुका है या ध्वस्त हो रहा है, लेकिन राज्य सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंगती है। बेगुसराय में सिमरिया घाट उत्तर बिहार के लोगों के लिए हरिद्वार के बराबर है लेकिन वहां की स्थिति और व्यवस्था देखकर रोना आता है, तीर्थ स्थल होने के बावजूद वहां ढंग से पीने की पानी की भी व्यवस्था नहीं है।
इसके अलावा अगर जमुई-मुंगेर तरफ की बात करें तो वहां भी कई ऐसितहासिक धरोहर है, जिसे संजोने की जरूरत है लेकिन सरकार को सिर्फ नालंदा, रोहतास, गया और इसके आस-पास के जिले नजर आते हैं।
मैं सरकार पर पक्षपात का आरोप नहीं लगा रहा हूं, लेकिन सवाल तो पक्षपात का ही उठता है।
मैंने बस कुछ ही जगहों के नाम बताएं हैं, ऐसे और भी कई ऐतिहासिक स्थल या धरोहर है जिसे संजोने की जरूरत है और पर्यटन के रूप में आगे बढ़ाने की आवश्यकता है लेकिन बिहार सरकार को सिर्फ कुछ ही जगहों पर पर्यटन स्थल नजर आती है।
देव चौधरी




