Sunday, 29 May 2022

बिहार पर्यटन या कुछ स्थानों का प्रोमोशन!




 बिहार में पर्यटन की अपार संभावनाएं है, पिछले कुछ वर्षों में राज्य सरकार द्वारा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए गए हैं और यही वजह है कि राज्य में पर्यटकों की रूचि बढ़ी है। हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक बिहार में कम संसाधन होने के बावजूद विदेशी पर्यटकों की संख्या में 31 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। 

केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय की एक रिपोर्ट के अनुसार, बिहार देश के टॉप-10 राज्यों में नौवें स्थान पर है और विदेशी पर्यटकों की रूचि गोवा से अधिक बिहार में देखी गयी है, लेकिन राज्य सरकार द्वारा सिर्फ बिहार के कुछ भागों को ही प्रमोट किया जा रहा है। 

मैं वैसे क्षेत्रवाद में विश्वास नहीं रखता हूं, लेकिन सरकार द्वारा अपनाए जा रहे नीति को देखकर चोट पहुंचती है, क्योंकि उत्तर बिहार में कई ऐतिहासिक स्थल है, जिसे संरक्षित करने की आवश्यकता है लेकिन राज्य सरकार इसपर चुप्पी साधी हूई है। 


अगर उत्तर बिहार में सिर्फ मधुबनी, सीतामढ़ी और दरभंगा को देखा जाए तो वहां कई ऐतिहासिक स्थल है। वहां के गौरवशाली इतिहास को मिट्टी में मिलाने का प्रयास किया जा रहा है, दरभंगा किला, राजनगर किला या अन्य ऐतिहासिक स्थल ध्वस्त हो चुका है या ध्वस्त हो रहा है, लेकिन राज्य सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंगती है। बेगुसराय में सिमरिया घाट उत्तर बिहार के लोगों के लिए हरिद्वार के बराबर है लेकिन वहां की स्थिति और व्यवस्था देखकर रोना आता है, तीर्थ स्थल होने के बावजूद वहां ढंग से पीने की पानी की भी व्यवस्था नहीं है।

इसके अलावा अगर जमुई-मुंगेर तरफ की बात करें तो वहां भी कई ऐसितहासिक धरोहर है, जिसे संजोने की जरूरत है लेकिन सरकार को सिर्फ नालंदा, रोहतास, गया और इसके आस-पास के जिले नजर आते हैं।

मैं सरकार पर पक्षपात का आरोप नहीं लगा रहा हूं, लेकिन सवाल तो पक्षपात का ही उठता  है। 

मैंने बस कुछ ही जगहों के नाम बताएं हैं, ऐसे और भी कई ऐतिहासिक स्थल या धरोहर है जिसे संजोने की जरूरत है और पर्यटन के रूप में आगे बढ़ाने की आवश्यकता है लेकिन बिहार सरकार को सिर्फ कुछ ही जगहों पर पर्यटन स्थल नजर आती है।


देव चौधरी

Thursday, 12 May 2022

कौन हो तुम, तुम्हारा नाम क्या है? सुनो…कौन हो तुम?



कौन हो तुम, तुम्हारा नाम क्या है?

सुनो....कौन हो तुम?


 

अच्छा सुनो, तुम्हें देखकर ऐसा लग रहा जैसे जन्मों का रिश्ता हो तुमसे,

कुछ कहना है तुमसे, क्या तुम सुनोगी?

कुछ दिनों से मैं खिल सा उठा हूं, 

कुछ दिनों से मेरा काम में मन लगने लगा है।


कुछ दिन पहले जो शहर विरान लग रहा था,

आज उसमें एक रौनक सी दिख रही है।

मुझे तुमसे कुछ कहना है, लेकिन कह नहीं पा रहा,

डर है कि तुम उसे सुन सकोगी या नहीं।

मैं अब खुद से सवाल करता हूं, तो जवाब तुमसे मिलता है,

मैं अब खुद को ढूंढता हूं तो तुम्हें पाता हूं।


तुमसे बहुत कुछ पूछना है,

लेकिन ऐसा लग रहा कि सब मुझे पहले से ही पता है।

सुनो, कभी-कभी सोचता हूं कि ये क्या हो रहा है, 

फिर सोचता हूं कि जो हो रहा है अच्छा हो रहा है।

क्योंकि तुम्हें सोचकर मन खिल उठता है, एक अलग सुकून मिलता है।

सुनो कौन हो तुम, तुम्हारा नाम क्या है?



देव चौधरी



Thursday, 5 May 2022

मधुबनी के लोहट में बनेगी नयी चीनी मिलः शाहनवाज





नयी दिल्ली, 05 मई।। बिहार के उद्योग मंत्री सैयद शाहनवाज हुसैन ने गुरुवार को यहां कहा कि बिहार में बंद पड़ी चीनी मिल, जूट मिल और पेपर मिल को चालू कराने के लिए राज्य सरकार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि मधुबनी के लोहट में जहां चीनी मिल थी, जो अब बंद पड़ी है, वहां पर इथेनॉल प्लांट लगाया जाएगा। साथ ही वहां पर एक चीनी मिल भी स्थापित की जाएगी। 

उद्योग मंत्री ने कहा कि बंद पड़ी पेपर मिल को भी चालू कराने पर सरकार विचार कर रही है। उन्होंने अशोक पेपर मिल दरभंगा के बारे में बताया कि इस मिल का मामला जल्द ही हल होने वाला है।  

उन्होंने यूनीवार्ता द्वारा पूछे गए सवाल, बिहार में बंद पड़ी चीनी मिल, जूट मिल और पेपर मिल को पुनः चालू कराने के सवाल पर कहा,''बंद पड़ी चीनी मिल की जमीन पर इथेनॉल प्लांट लगाए जाएंगे। जूट मिल और पेपर मिल को लेकर भी सरकार विचार कर रही है।''

उन्होंने कहा,''मधुबनी के लोहट में चीनी मिल की जमीन पर इथेनॉल प्लांट के साथ-साथ वहां एक चीनी मिल भी बनाई जाएगी।''  

इसके साथ ही उन्होंने कहा,''अशोक पेपर मिल का भी मामला हल होने वाला है।''

श्री हुसैन ने कहा कि बिहार औद्योगिकीकरण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में पिछले एक साल में 555 औद्योगिक ईकाइयों की स्थापना के लिए 36 हजार 253 करोड़ रुपए के प्रस्ताव के निवेश आए हैं।


देव चौधरी

Monday, 2 May 2022

इक्कीसवीं सदी के भारत में सैकड़ों पुलिस स्टेशनों में नहीं है वाहन, टेलिफोन, वायरलेस सुविधा

 



इक्कीसवीं सदी के भारत में आज भी ऐसे कई पुलिस स्टेशन है, जहां मूलभूत सुविधाएं तक मौजूद नहीं है। हम तेजी से डिजिटल दुनिया की ओर कदम बढ़ा रहे हैं, देश-दुनिया में तेजी से बढ़ने के लिए एक से एक नया प्रयोग कर रहे हैं। वहीं, आज भी देश में कुछ राज्यों के पुलिस स्टेशनों में वाहन, टेलिफोन और वायरलेस/मोबाइल तक नहीं है। 

आज हम इतने आगे बढ़ चुके हैं कि एक फोन कॉल पर कोई भी वस्तु हमारे दरवाजे पर होती है, ऐसे में उन थानों की क्या स्थिति होगी, जहां ये सुविधाएं अभी तक पहुंची ही नहीं है। 

पुलिस-प्रशिक्षण, आधुनिकीकरण औऱ सुधार के लिए विभाग संबंधित गृह कार्य संबंधी संसदीय स्थायी समिति द्वारा सदन में पेश की गयी रिपोर्ट के अनुसार, देश में 257 पुलिस स्टेशनों में वाहन नहीं है, 638 पुलिस थानों में टेलिफोन नहीं है और 143 पुलिस थानों में वायरलेस/मोबाइल नहीं है। 

देश में इन पुलिस स्टेशनों में टेलिफोन या समुचित वायरलेस कनेक्टिविटि नहीं हैं, विशेष रूप से अरुणआचल प्रदेश, ओडिशा और पंजाब  जैसै संवेदनशील राज्यों में, खासकर इस तथ्य को देखते हुए इनमें से कुछ राज्यों को वर्ष 2018-19 में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए पुरस्कृत किया गया था। इसके अलावा, केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर काफी संवेदनशील सीमावर्ती संघ राज्य क्षेत्र में भी काफी संख्या में पुलिस स्टेशनों में टेलिफोन और वायरलेस सेट की सुविधा नहीं है। 

इसको लेकर समिति ने गृह मंत्रालय से सिफारिश करते हुए संबंधित राज्यों को तुरंत इस ओर कार्य करने के लिए सलाह दी है।


देव चौधरी

बचपन वाला सरस्वती पूजा

 सरस्वती पूजा, ये पर्व महज एक दिन का होता है, लेकिन इसकी तैयारी में महीने भर से जुट जाते थे। लोगों को इकट्ठा करना, चंदा के लिए पैसे जुटाना, ...