ये मिट्टी तुम्हे पुकार रही है, क्योंकि तुम हो विदेशों में रहते,
हम तो मजदूर है, हम रहेंगे ऐसे ही पलायन करते!!
तुम्हीं हो दाता-दिनकर तुम्हीं हो सच्चे देशभक्त,
हम भी निकले से घर से की बनेंगे अच्छे देशभक्त!!
तुम्हें लाने सरकार उड़ाए हवाई जहाज,
हमें छोड़ दिया है पलायन करने,
पता नहीं अभी भी कितने भूखे मजदूर,
सो रहे है पटरियों पर मरने!!
जिस हवाई पट्टी पर लैंड करता है तुम्हारे विमान,
उसे कभी बनाये थे हम मजदूर,
आज हम भूखे पेट सड़को पर चल रहे है,
कर दिये हो तुम हमें मजबूर!!
अच्छे दिन का सपना दिखाने, बन कर आये थे व्यापारी,
अच्छे दिन आयेंगे बोलकर, बदले में दिए हो बेरोजगारी!!
अब कितना कहूँ, कितना लिखूं,
हे माई बाप अब तो सुन लो मेरी आवाज-2!!

