Wednesday, 28 October 2020

हमें जारी रखनी होगी कुपोषण के ख़िलाफ़ लड़ाई।



हमें आजादी मिले हुए 74 साल हो गए लेकिन आज तक हम कुपोषण से आजाद नहीं हो पाए हैं। कुपोषण से आज भी भारत लड़ाई लड़ रहा है। कुपोषण एक ऐसी बीमारी है जिससे आजादी मिलना बेहद जरूरी है। भारत के प्रधानमंत्री कुपोषण पर जीत पाने के लिए कई सारे कार्यक्रम चला रहे हैं। दुनिया भर में 70 करोड़ बच्चे कुपोषण का शिकार है। भारत की स्थिति बेहद चिंताजनक है। यूनिसेफ ने एक आंकड़ा जारी जारी करते हुए कहा है कि 5 वर्ष से कम उम्र वाले 14.9 करोड बच्चें  अविकसित है। आईसीएमआर के एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में मरने वाले बच्चों की संख्या में से 68.2% बच्चे कुपोषण के कारण से मर रहा है।
                      कुछ दिन पहले जारी वैश्विक भुखमरी सूचकांक, 2020 में भारत को 107 देशों की सुची में 94वें स्थान पर दिखाया गया है। जिसमें भारत को श्रीलंका, नेपाल, पाकिस्तान, बांग्लादेश जैसे देशों से ख़राब हालत दिखाए थे।इसलिए जमकर इसपर विवाद हो रहा है। 107 देशों की सूची में भारत से मात्र 13 देश ही पीछे है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत की 14 प्रतिशत आबादी अल्पपोषित है तथा बच्चों में बौनेपन की दर 37.4 प्रतिशत है।
        कुपोषण से बचने के लिए झारखंड सरकार के द्वारा एक अभियान चलाया जा रहा है जिसका नाम है पोषण वाटिका। इस अभियान की अगुवाई मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन खुद कर रहे हैं। इस अभियान के अंतर्गत एक महीने के भीतर राज्य में सखी मंडलों के जरिये 25 हजार से अधिक जागरुकता अभियान चलाया गया। इस पोषण वाटिका अभियान को शुरू करने के लिए  जेएसएलपीएस (झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी, ग्रामीण विकास विभाग) ने जोर दिया है। अभियान के तहत ग्रामीण परिवार अपने घरों के पास खाली पड़े जगह पर पोषक सब्जियों, फलों के पौधे लगायें, इसके लिये उन्हें तैयार किया जा रहा है। इससे उन्हें सालों भर अपने घर की ही वाटिका से पोषण आहार मिले,जिससे कुपोषण के खिलाफ लड़ाई लड़ी जा सकें।

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