देश में भारत का अभिन्न अंग जम्मू कश्मीर को लेकर हमेशा से विवादों का दौर रहा है। अभी दो दिन पहले ही एक नया विवाद सामने आया है। जिससे कुछ दिनों के लिए उन सभी लोगों को बल मिल जाएगा या समर्थन मिल जाएगा, जो घाटी को लेकर हमेशा से देश के खिलाफ अपना रूख़ अख्तियार किए हुए रहते हैं।
Sunday, 6 February 2022
भारत पर रूस का नया चाल, कश्मीर पर विवादों को दिया तूल
देश में भारत का अभिन्न अंग जम्मू कश्मीर को लेकर हमेशा से विवादों का दौर रहा है। अभी दो दिन पहले ही एक नया विवाद सामने आया है। जिससे कुछ दिनों के लिए उन सभी लोगों को बल मिल जाएगा या समर्थन मिल जाएगा, जो घाटी को लेकर हमेशा से देश के खिलाफ अपना रूख़ अख्तियार किए हुए रहते हैं।
Friday, 16 July 2021
कांवर यात्रा पर लगा ग्रहण, सैलानियों को छूट...
फिलहाल कोरोना को लेकर जो स्थिति बनी हुई है ऐसे में हमें बहुत सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि कोरोना की तीसरी लहर आने को लेकर आशंका जताई जा रही है. सभी संभावनाओं को देखते हुए राज्य व केंद्र सरकार तीसरी लहर से लड़ने के लिए तैयारी में जुट गई है. कोशिश की जा रही है कि आने वाले समय में कोरोना से कम से कम क्षति हो. इसी बीच उत्तराखंड सरकार ने इस साल कांवर यात्रा पर भी रोक लगाई है. व्यक्तिगत रूप से मैं इस फैसले से संतुष्ट हूँ क्योंकि हमें ऐसी कोई भी गतिविधि से बचना चाहिए जिससे आने वाले समय में स्थिति बिगड़ जाये.
अब सवाल ये है कि जिस तरह कांवर यात्रियों को रोकने की व्यवस्था की जा रही है, क्या उसी तरह उन सैलानियों को नहीं रोका जा सकता था या रोका नहीं जा सकता है जो तीसरी लहर को आमंत्रित कर चुके हैं या करने में लगे हुए हैं. सरकार को कोई भी फैसला सभी पक्षों को ध्यान में रखकर ही करना चाहिए. उत्तराखंड सरकार द्वारा कांवर यात्रा को मंजूरी न देकर सही फैसला किया गया है. इस फैसले से कुछ समय के लिए कांवर यात्रियों को कष्ट पहुंचा होगा क्योंकि ये मामला धर्म और भावना से सम्बंधित है लेकिन यकीन मानिए इस फैसले पर अगर सही तरह से काम किया गया तो इससे सकारात्मक परिणाम आने की पूरी संभावना है. ऐसे फैसले के साथ ही सरकार को उनलोगों पर भी सख़्ती दिखाने की जरूरत है जो कोरोना के नाम पर वर्क फ्रॉम होम की जगह वर्क फर्म हिमाचल और उत्तराखंड को तरज़ीह दे रहे हैं.
Saturday, 10 July 2021
असामान्य तापमान के कारण देश में प्रतिवर्ष होती है 7.4 लाख मौतें
दुनियाभर में तापमान अस्थिरता के कारण करीब 50 लाख लोगों की जान चली जाती है. भारत में असमान्य मौसम के कारण प्रत्येक वर्ष 7.4 लाख लोग जान गंवा देते हैं. लैसेंट प्लैनेटरी हेल्थ जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट में हो रही मौतें के पीछे जलवायु परिवर्तन को मुख्य वजह बताया गया है. जलवायु परिवर्तन के कारण ही कभी अत्याधिक सर्दी तो कभी अत्याधिक गर्मी पड़ रही है. आस्ट्रेलिया के मोनाश यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने भी इस बात की पुष्टी की है.
वर्ष 2000 से 2019 के बीच किए गए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि दुनियाभर में तापमान बढ़ने से मौत की घटनाओं में वृद्धी हुई है. स्पष्ट तौर पर देखा जा सकता है कि जलवायु परिवर्तन से होने वाली ग्लोबल वार्मिंग से भविष्य में मौत की संख्या में इजाफा होना तय है.
अध्ययन कर रहे शोधकर्ताओं के मुताबिक भारत में असमान्य सर्दी से 6,55,400 लोगों की मौत होती है और असमान्य गर्मी से करीब 83,700 लोग अपनी जान गंवा देते हैं. इस शोध के बाद कई सारे सवाल मन में उठते हैं कि असमान्य तापमान के कारण हो रही इन मौतों को कैसे रोका जाए? हालांकि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर प्रयास किया जा रहा है साथ ही भारत भी इससे निपटने के लिए प्रयासरत है. अब देखना यह है कि असमान्य तापमान के कारण हो रही मौतों को कैसे नियंत्रित किया जा सकता है.
जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर किए जा रहे प्रयास-
संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क सम्मेलन(UNFCCC)- इस योजना के तहत वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को नियंत्रित करना है.
पेरिस समझौता- जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए यह एक अंतर्राष्ट्रीय समझौता है.
COP25- इस मिशन के तहत जलवायु परिवर्तन से जूझ रहे गरीब देशों के लिए 200 देशों के प्रतिनिधियों ने मदद की घोषणा किया है.
जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए भारत के प्रयास-
जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्ययोजना- 2008 में शुरु किए गए इस योजना के अंतर्गत जनता के प्रतिनिधियों, सरकार की विभिन्न एजेंसियों, वैज्ञानिकों, उद्योग और समुदायों को जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न खतरे से निपटना है. इस योजना के तहत 8 अलग-अलग मिशन को शामिल किया गया है.
अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन- ये सौर ऊर्जा से संपन्न देशों का एक समझौता है.
Source/Reference:-
The Lancet Planetary Health Journals
Sunday, 20 June 2021
फादर्स डे पर पिता के लिए कुछ शब्द..
Fathers Day.. पिता के लिए सिर्फ एक ही दिन मेरे ख्याल से बहुत ही नाइंसाफी है. एक पिता के लिए हर दिन खास होना चाहिए. वैसे तो पिता को शब्दों से बयां करना बहुत मुश्किल है लेकिन आज फादर्स डे पर मैं कुछ शब्द अपने पिता को अर्पित करता हूँ...
एक पिता वो इंसान है जो खुद साईकल पर चढ़ कर भी, अपने बच्चों को फर्स्ट क्लास एसी का सफर करवाते हैं. एक पिता वो इंसान है, जो चाहते हैं कि उनके बेटे के नाम से पूरी दुनिया उन्हें जानें.. पिता वो इंसान है, जो अपने बच्चों की ख्वाहिश पूरी करने के लिए, अपने सारे सपने को कुचल देते हैं.
किसी ने एक बेहद खूबसूरत पंक्ति लिखी है कि, कंधो पर झुलाया कंधो पर घुमाया, एक पापा की बदौलत ही मेरा जीवन खुबसूरत बन पाया. सच में पिता के होने से बेटे का जीवन सुखमय बन जाता है. पिता उस दीपक की तरह है जो खुद अंधेरे में रहकर, सारे जहां को प्रकाशमय करता है..
अंत में कुछ शब्द पापा आपके लिए... क्या कहूँ आपके बारे में, आपने सोचा नहीं कभी खुद के बारे में..आपने मुझे ज़िंदगी भर दिया, आपका तहे दिल से शुक्रिया❤️🙏
अगर मिलें खुदा तो यही कहूंगा, जब भी मेरा जन्म हो मुझे पिता के रूप में आप ही मिले.. Love You Papa ❤️❤️
Saturday, 12 June 2021
ओवैसी की पार्टी बिहार में चुनाव जीतने में कैसे हुई कामयाब?
बीते वर्ष संपन्न हुए बिहार विधानसभा चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने पांच सीटों पर सफलता पाई. ओवैसी की इस जीत के बाद तमाम राजनीतिक पार्टियों में कई सारे सवाल उठने लगे. इससे पहले ओवैसी की पार्टी को सिर्फ हैदराबाद की पार्टी कहा जाता था, जो बिहार विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद बदल गया. बिहार में सीमांचल के जिस इलाके में AIMIM ने पांच सीटों पर जीत दर्ज की है वहां पर क्या वजह रही जो बिहार के बाहर की पार्टी को सफलता मिली.
Wednesday, 9 June 2021
सत्ता सुख के लिए आत्मसम्मान या विचारधारा से समझौता
किसी भी व्यक्ति के लिए आत्मसम्मान सबसे बड़ी चीज है और उसके बाद जो चीज है वह है विचारधारा. कभी-कभी आत्मसम्मान और विचारधारा दोनों में से किसी एक को चुनना पड़ जाता है. हमारे सामने ऐसे कई उदाहरण है जिसमें साफ दिखा है कि इन दोनों में से आत्मसम्मान को ही चुना जाता है. अभी हाल ही में कांग्रेस का दामन छोड़ कर भाजपा में शामिल हुए जितिन प्रसाद से हम साफ तौर पर समझ सकते हैं. ऐसे कई नेता है जो एक दल को छोड़कर दूसरे दल में चले जाते हैं. इसके पीछे ये वजह है कि पार्टी में उन्हें उचित स्थान नहीं मिल पाता है या पार्टी के द्वारा लगातार उन्हें दरकिनार कर दिया जाता है.
समझने वाली बात यह है कि आत्मसम्मान के लिए विचारधारा बदलते देर नहीं लगती है. कल तक पूर्व कांग्रेस नेता जितिन प्रसाद पंडित जवाहर लाल नेहरु के ऊपर लगते आरोपों को खारिज करते थे, लेकिन आज से भाजपा में शामिल हो जाने के बाद वे खुद जवाहर लाल नेहरु पर आरोप मढ़ेंगे. या कल तक उनके द्वारा भाजपा पर लगाये गये आरोप को वे कैसे खारिज करेंगे? यहां पर सत्ता सुख या आत्मसम्मान के लिए उन्होंने विचारधारा से समझौता कर लिया है. यह कहना गलत नहीं होगा कि इस तरह से आत्मसम्मान को बचाने के लिए कहीं न कहीं जनता के मन में उनके लिए अविश्वास पैदा होता है. क्योंकि आम जनता एक विचारधारा से बंधी होती है.
Friday, 8 January 2021
खुले मन से हो किसान और सरकार के बीच कृषि कानून पर बात।
किसान और सरकार के बीच कृषि कानून को लेकर तकरार बढ़ती जा रही है। दोनों पक्षों के बीच बातचीत का सिलसिला जारी है। कल आठवें दौर की बैठक भी बेनतीजा रही। किसान जहां अपनी दो मुख्य मांगों को लेकर अड़े है, जिसमें पहला किसान कानून को रद्द करना तथा दूसरा एमएसपी को कानून का रूप दिया जाना शामिल है। वहीं सरकार इस मसले का हल दोनों पक्षों के बीच बातचीत करके निकालने में जुटी हुई हैं। हालांकि 15 जनवरी को एक बार फिर दोनों पक्षों के बीच बैठक होने वाली है, जिसमें यह कयास लगाया जा सकता है कि कुछ बात बन जाये। सरकार निरन्तर कहती आ रही है कि एक बार किसान और सरकार सभी बिंदुओं पर खुल कर बात करें, परन्तु किसान एक स्वर में कानून खत्म कराने पर तुले हैं।
कल बैठक समाप्त होने के बाद भी यही बात सामने आई कि किसान, कृषि कानून को लेकर किसी भी बिंदु पर बात नहीं करना चाहते हैं। सरकार के बार-बार कहने के बावजूद भी किसान सिर्फ पोस्टर के माध्यम से अपनी बात बयां किये। अगर ऐसा ही होता रहा तो, चाहे दोनों पक्षों के बीच कितने भी दौर की बातचीत क्यों न हो जाये सब बेनतीजा ही रहेगी। किसानों को आंदोलन करते हुए दूसरे माह होने को है, ऐसे में अगर यह आंदोलन और अधिक लंबा चला तो देश के हर कोने में इसका प्रभाव देखने को मिलेगा, साथ ही आने वाले समय में कई क्षेत्र इस आंदोलन की वजह से प्रभावित हो सकता हैं।
बचपन वाला सरस्वती पूजा
सरस्वती पूजा, ये पर्व महज एक दिन का होता है, लेकिन इसकी तैयारी में महीने भर से जुट जाते थे। लोगों को इकट्ठा करना, चंदा के लिए पैसे जुटाना, ...
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प्रथम प्रेस आयोग ने भारत में प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा एंव पत्रकारिता में उच्च आदर्श कायम करने के उद्देश्य से एक प्रेस परिषद...
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