मंगलवार को राष्ट्रपति भवन से एक निमंत्रण पत्र जारी होता है, जिसमें 'प्रेसिडेंट ऑफ इंडिया' की जगह 'प्रेसिडेंट ऑफ भारत' लिखा गया है। हमेशा देखा गया है कि अंग्रेजी में ऐसे सरकारी कागज या किसी अन्य पत्र पर इंडिया लिखा जाता है, लेकिन निमंत्रण पत्र में ऐसा नहीं था।
दरअसल, भारत में जी-20 का शिखर सम्मेलन होने जा रहा है। इस शिखर सम्मेलन के भोज में शामिल होने वाले मेहमानों को निमंत्रण पत्र भेजा जा रहा है और वही निमंत्रण पत्र केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को भी भेजा गया, जिसमें 'प्रेसिडेंट ऑफ भारत' लिखा था। ये पत्र सोशल मीडिया पर काफी तेजी से फैल गया और इसके बाद सभी पार्टियों के बीच इस बात की चर्चा तेज हो गई कि क्या अब 'इंडिया' के जगह सिर्फ 'भारत' ही लिखा जाएगा।
आइए जानते हैं कि देश का नाम इंडिया की जगह सिर्फ भारत लिखे जाने के लिए क्या करना होगा? देश का नाम बदलने के लिए क्या करना होगा?
क्या कहता है हमारा संविधान?
हमारे संविधान के अनुच्छेद एक में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि इंडिया और भारत दोनों ही शब्द प्रयोग किए जा सकते हैं और दोनों का एक ही मतलब होगा। संविधान में लिखा गया है, 'इंडिया दैट इज भारत, यूनियन ऑफ स्टेट्स'। इसका मतलब है कि इंडिया और भारत एक ही है, जो राज्यों का संघ है।
भारतीय संविधान में इस बात की पूरी आजादी है कि आप इंडिया और भारत दोनों में से किसी का भी प्रयोग कर सकते हैं। इसके लिए कोई मनाही नहीं है। सरकार चाहे तो इंडिया लिखे या भारत। वैसे आमतौर पर देखा गया है कि हिंदी में भारत और अंग्रेजी में इंडिया लिखा जाता है।
कैसे बदला जा सकता है देश का नाम?
अब सवाल है कि क्या देश का नाम बदला जा सकता है? तो इसका जवाब है हां। देश का नाम बिल्कुल बदला जा सकता है और इसे बदलने के लिए संसद का रुख करना होगा। संविधान के अनुच्छेद एक में संशोधन करके सरकार देश का नाम बदलने वाली बिल ला सकती है और देश का नाम बदल सकती है।
देश का नाम बदलने के लिए क्या करना होगा?
अगर सरकार देश का नाम बदलना चाहती है तो उसे संसद में कम से कम दो तिहाई मतों की जरूरत पड़ेगी। यानी कि नाम बदलने के प्रस्ताव पर करीब 66 प्रतिशत सदस्यों के समर्थन चाहिए होगा। हालांकि, नॉर्मल बिल के लिए सिर्फ 50 प्रतिशत सांसदों के समर्थन की आवश्यकता पड़ती है। इसके अलावा कुछ ऐसे भी संशोधन हैं, जिसके लिए केंद्र को राज्यों से समर्थन प्राप्त करना होगा।
नाम बदलने के लिए कांग्रेस सांसद ने की थी मांग
ऐसा पहली बार नहीं है जब देश का नाम इंडिया से बदलकर भारत करने की चर्चा हो रही है। इससे पहले कई बार इस बात पर जोर दिया जा चुका है। वर्ष 2010 और 2012 में कांग्रेस के सांसद शांताराम नाइक ने निजी बिल पेश कर देश का नाम इंडिया से बदलकर भारत करने की मांग की थी। इसके अलावा पूर्व सांसद योगी आदित्यनाथ (वर्तमान में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री) ने भी 2015 में देश का नाम बदलने के लिए निजी बिल पेश किया था।
ये मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच चुका है। देश का नाम इंडिया से बदलकर सिर्फ भारत करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में 2016 और 2020 में याचिकाएं दाखिल हो चुकी हैं। हालांकि, दोनों ही याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी थी।
बता दें कि सरकार ने 18 से 22 सितंबर के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाया है। इस विशेष सत्र को लेकर ज्यादा जानकारी तो नहीं दी गई है, लेकिन सरकार ने वन नेशन वन इलेक्शन पर एक समिति बनाई है। इसी बीच इंडिया से भारत को लेकर सियासी घमासान शुरू हो गया है।

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