Friday, 9 August 2019

खाने को मत तौलो धर्म की तराजू पर!

                  "खाने को मत तौलो धर्म की तराजू पर"

                पूरे विश्व में भारत देश एक ऐसा देश है जहां सभी धर्मों को एक समान देखा जाता है। ऐसे में अगर भारत में खाने को लेकर धर्म पर सवाल उठता है इसे बड़ी निन्दनीय बात नहीं हो सकती हैं। जिस तरह से कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर एक डिलीवरी ब्वॉय से खाना लेने से पहले उसका धर्म जानने को लेकर मुद्दा गर्म हुआ था यह हमारे भारत की संस्कृति सभ्यता को चोट पहुंचाती दिखीं। उस आदमी ने धर्म जानने से पहले क्या यह नहीं सोचा कि यह अन्न कहां से आया, इसे किस धर्म के लोगों ने उपजाया होगा। एक ओर हम धरती से अंतरिक्ष तक अपना वर्चस्व कायम करने में लगे हैं और दूसरी ओर हम खाने को धर्म की तराजू में तौल रहे हैं। हमें खाने का अपमान करने से पहले एक पल के लिए यह जरूर सोचना चाहिए कि आज जिस खाने को अपमान कर रहे हैं वह खाना किसी-किसी को नसीब तक नहीं होता है।
               आजकल धर्म के नाम पर बहस छिड़ी हुई है जो हमारे भारत के लिए आहितकारी साबित हो सकते हैं क्योंकि भारत को आपसी भाईचारे के लिए जाना जाता है। भारत में खाने और पानी को लेकर जाति-धर्म की राजनीति नहीं करनी चाहिए। इस तरह की सोच रखने वाले भविष्य में भारत के लिए खतरा साबित हो सकते हैं।

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