Wednesday, 9 June 2021

सत्ता सुख के लिए आत्मसम्मान या विचारधारा से समझौता

 किसी भी व्यक्ति के लिए आत्मसम्मान सबसे बड़ी चीज है और उसके बाद जो चीज है वह है विचारधारा. कभी-कभी आत्मसम्मान और विचारधारा दोनों में से किसी एक को चुनना पड़ जाता है. हमारे सामने ऐसे कई उदाहरण है जिसमें साफ दिखा है कि इन दोनों में से आत्मसम्मान को ही चुना जाता है. अभी हाल ही में कांग्रेस का दामन छोड़ कर भाजपा में शामिल हुए जितिन प्रसाद से हम साफ तौर पर समझ सकते हैं. ऐसे कई नेता है जो एक दल को छोड़कर दूसरे दल में चले जाते हैं. इसके पीछे ये वजह है कि पार्टी में उन्हें उचित स्थान नहीं मिल पाता है या पार्टी के द्वारा लगातार उन्हें दरकिनार कर दिया जाता है.

         समझने वाली बात यह है कि आत्मसम्मान के लिए विचारधारा बदलते देर नहीं लगती है. कल तक पूर्व कांग्रेस नेता जितिन प्रसाद पंडित जवाहर लाल नेहरु के ऊपर लगते आरोपों को खारिज करते थे, लेकिन आज से भाजपा में शामिल हो जाने के बाद वे खुद जवाहर लाल नेहरु पर आरोप मढ़ेंगे. या कल तक उनके द्वारा भाजपा पर लगाये गये आरोप को वे कैसे खारिज करेंगे? यहां पर सत्ता सुख या आत्मसम्मान के लिए उन्होंने विचारधारा से समझौता कर लिया है. यह कहना गलत नहीं होगा कि इस तरह से आत्मसम्मान को बचाने के लिए कहीं न कहीं जनता के मन में उनके लिए अविश्वास पैदा होता है. क्योंकि आम जनता एक विचारधारा से बंधी होती है.

2 comments:

  1. आपने बिल्कुल सही लिखा ज़नाब , आत्म सम्मान के लिए कोई भी किसी प्रकार का क़दम उठा सकता है रही बात विचार धारा की तो ये बदलने में तनिक समय नहीं लगता है....

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  2. धन्यवाद सोनू जी बहुमुल्य प्रतिक्रिया देने के लिए..

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