Wednesday, 28 October 2020

क्या नीतीश कुमार दुबारा सत्ता में वापसी करेंगे?




इस बार बिहार विधानसभा चुनाव काफी दिलचस्प होने वाला हैं क्योंकि वर्तमान परिदृश्य में जहां एक तरफ एनडीए का चेहरा नीतीश कुमार सामने आए हैं। वहीं दूसरी ओर महागठबंधन की तरफ से तेजस्वी यादव ने मोर्चा संभाला हुआ है। अब यहां सबसे अहम बात यह है कि नीतीश कुमार का विरोध कई जगह जमकर किया जा रहा है, लेकिन वहीं अगर हम बीजेपी की बात करें तो उनका विरोध नहीं हो रहा है। इस बार एलजेपी एनडीए से अलग होकर चुनाव लड़ रही है, और वह बीजेपी के खिलाफ अपना उम्मीदवार नहीं उतारी हैं। बल्कि जेडीयू के ख़िलाफ़ उम्मीदवार मैदान में दिए हैं। नीतीश कुमार के लिए इस समय बिहार विधानसभा में सत्ता में वापसी करना थोड़ा मुश्किल साबित हो सकता है। मुश्किल साबित इसलिए हो सकता है, क्योंकि इस बार समीकरण बहुत बदला हुआ हुआ समीकरण बहुत बदला हुआ हुआ है।एलजेपी सीधे तौर पर नीतीश कुमार को नुकसान पहुंचाने में लगी है। वहीं वह बिजेपी के समर्थन में है।

                    महागठबंधन की तरफ से तेजस्वी यादव उन्हें नुकसान पहुंचाने में लगा है। परंतु नीतीश कुमार के लिए खास बात यह है कि महागठबंधन के पास नीतीश जैसा चेहरा नहीं है। तेजस्वी यादव पर लोग भरोसा इसलिए नहीं दिखाना चाहते हैं, क्योंकि उनके पिता लालू प्रसाद यादव चारा घोटाले के अंतर्गत जेल में है। जिस वजह से लोगों को डर है कि, अगर तेजस्वी यादव सरकार बनाती है, तो फिर से जंगलराज वाला सिस्टम बिहार में लागू हो जाएगा। हालांकि तेजस्वी यादव युवाओं को लुभाने की कोशिश में लगे हुए हैं। कुल मिलाकर बात करे तो नीतीश कुमार फिर से सत्ता में वापसी करेंगे।

हमें जारी रखनी होगी कुपोषण के ख़िलाफ़ लड़ाई।



हमें आजादी मिले हुए 74 साल हो गए लेकिन आज तक हम कुपोषण से आजाद नहीं हो पाए हैं। कुपोषण से आज भी भारत लड़ाई लड़ रहा है। कुपोषण एक ऐसी बीमारी है जिससे आजादी मिलना बेहद जरूरी है। भारत के प्रधानमंत्री कुपोषण पर जीत पाने के लिए कई सारे कार्यक्रम चला रहे हैं। दुनिया भर में 70 करोड़ बच्चे कुपोषण का शिकार है। भारत की स्थिति बेहद चिंताजनक है। यूनिसेफ ने एक आंकड़ा जारी जारी करते हुए कहा है कि 5 वर्ष से कम उम्र वाले 14.9 करोड बच्चें  अविकसित है। आईसीएमआर के एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में मरने वाले बच्चों की संख्या में से 68.2% बच्चे कुपोषण के कारण से मर रहा है।
                      कुछ दिन पहले जारी वैश्विक भुखमरी सूचकांक, 2020 में भारत को 107 देशों की सुची में 94वें स्थान पर दिखाया गया है। जिसमें भारत को श्रीलंका, नेपाल, पाकिस्तान, बांग्लादेश जैसे देशों से ख़राब हालत दिखाए थे।इसलिए जमकर इसपर विवाद हो रहा है। 107 देशों की सूची में भारत से मात्र 13 देश ही पीछे है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत की 14 प्रतिशत आबादी अल्पपोषित है तथा बच्चों में बौनेपन की दर 37.4 प्रतिशत है।
        कुपोषण से बचने के लिए झारखंड सरकार के द्वारा एक अभियान चलाया जा रहा है जिसका नाम है पोषण वाटिका। इस अभियान की अगुवाई मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन खुद कर रहे हैं। इस अभियान के अंतर्गत एक महीने के भीतर राज्य में सखी मंडलों के जरिये 25 हजार से अधिक जागरुकता अभियान चलाया गया। इस पोषण वाटिका अभियान को शुरू करने के लिए  जेएसएलपीएस (झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी, ग्रामीण विकास विभाग) ने जोर दिया है। अभियान के तहत ग्रामीण परिवार अपने घरों के पास खाली पड़े जगह पर पोषक सब्जियों, फलों के पौधे लगायें, इसके लिये उन्हें तैयार किया जा रहा है। इससे उन्हें सालों भर अपने घर की ही वाटिका से पोषण आहार मिले,जिससे कुपोषण के खिलाफ लड़ाई लड़ी जा सकें।

Sunday, 16 August 2020

तुम्हारा आना कुछ खास नहीं था, लेकिन तुम्हारा जाना कोई भुला नहीं पायेगा...

 


माही....माही मार रहा है... अब ये सुनने को नहीं मिलेगा...

माही सिर्फ क्रिकेट से सन्यास नहीं लिया है....बल्कि उन्होंने तो.....एक युग का अंत किया है....


आज भी मुझे याद है...बचपन में जब मैं तीसरी कक्षा में था......तो एक क्रिकेटर का फोटो 5 रुपया वाला कॉपी पर हुआ करता था......महीने में 5 से 7 कॉपियां खरीदता था ताकि उस फ़ोटो को निकाल कर अपने पास रख सकूं....            


उसके लंबे लंबे बाल थे....और नाम था धोनी.... महेंद्र सिंह धोनी... उस समय क्रिकेट का C तक मुझे नहीं पता था...लेकिन धोनी का मतलब पता था.... 


सच बताऊं तो मैं बहुत मतलबी था...मतलबी इसलिए था कि मुझे सिर्फ धोनी से लगाव था... मैं सिर्फ यही चाहता था कि क्रिकेट का पूरा ओवर धोनी क्रीज़ पर डटें रहें....


जब माही खेल रहा होता था....तो मैं सब कुछ भूल कर उसे ही देखता था.... पता नहीं माही से कुछ अलग ही लेवल का लगाव है....


धोनी मने क्रिकेट....

धोनी मने धैर्य

धोनी मने साहस

धोनी का मतलब everything is पॉसिबल...



 कहते है....कि जो लीजेंड होते है उनका स्टाइल की ग़जब होता है.... रन ऑउट से क्रिकेट की शुरुआत और रन ऑउट से ही क्रिकेट का अंत..... इस दोनों रन ऑउट के बीच फर्क बस इतना है कि जब पहली बार रन आउट हुआ था.....तो खुद निराश हुए थे....और जब अंतिम बार रन आउट हुए तो....पूरा देश रो रहा था.....


मुझे लगता है संघर्ष शब्द की पर्यायवाची में एक नया शब्द जुड़ गया है जो है,"धोनी".


माही को मैं अपने शब्दों के ज़रिए बयां करूँ यह सम्भव ही नहीं है.....

अंत में ये 4 पंक्ति....


तुम्हारा आना कुछ खास नहीं था.....

लेकिन तुम्हारा जाना कोई भुला नहीं पायेगा...


कैसे तुमने संघर्ष के बल पर इतिहास रच डाला...

और कैसे तुमने कैप्टन कूल बनकर दुनिया को हिला डाला....


माही....तुम हमेशा दिल में रहोगे.... लव यू माही... मिस यु माही..














Saturday, 8 August 2020

हमारे जीवन में सोशल मीडिया का महत्व।। Importance of Social Media in our life.

     


       दुनिया में शायद ही कोई इंसान होगा जिसे अकेला रहना पसंद हो। बहुत ही कम ऐसे लोग होंगे जो खुद को दुनिया में होने वाली गतिविधियों से दूर रखते हो। फ़िलहाल जो वर्तमान में हालात है, ऐसे हालात में तो लोग काफी ज्यादा ख़ुद को लोगों के बीच में देखना चाहते हैं। कोविड19 और लॉकडाउन जैसी परिस्थितियों में हम सब अलग-अलग रह रहे हैं। इस दौरान न हम किसी से मिल सकते है और न ही किसी के साथ घूम सकते है। ऐसे में ख़ुद को अकेलेपन से दूर करने के लिए हम अपने कामों में उलझे रहते है। इस अकेलेपन को दूर करने के लिए हमारे पास एक बेहतरीन हथियार है और वो है 'सोशल मीडिया'। सोशल मीडिया वह तकनीक है जिसके जरिये हम अपने परिवार वालों के साथ वक़्त ज़ाया कर सकते है। यह वह होटल व रेस्टूरेंट है जहां हम अपने चाहने वालों के साथ बात कर सकते है। इन दिनों सोशल मीडिया एक मात्र उपाय है ख़ुद को अकेलेपन से दूर रखने का। इसके जरिये आज कल तो सभी काम भी किया जा रहा है। जबसे लॉकडाउन लागू हुआ है तथा सब कुछ बन्द हो गया है। ऐसे वक्त में सोशल मीडिया वह तकनीक है जिसके जरिये हम अपने कामों को कर रहें है। आज कल सभी स्कूल, कॉलेज, शिक्षण संस्थान, कोचिंग सब के सब ऑनलाइन वर्ग संचालन कर रहे हैं। लोगों को अभी वर्क फ्रॉम होम की सुविधा मिली है तथा वर्क फ्रॉम होम इसी सोशल मीडिया के ज़रिए सम्पन्न किया जा रहा है। 

       

       

सोशल मीडिया समाज के सामाजिक विकास में अपनी अहम भूमिका निभाता है और इन दिनों तो कई व्यवसायों को बढ़ाने में भी मदद कर रहा है। यह सोशल मीडिया, मार्केटिंग जैसे साधन प्रदान करता है जो लाखों सशक्त ग्राहकों तक पहुंचता है। हम आसानी से सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी और समाचार प्राप्त कर सकते हैं। केपीएमजी के एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में इंटरनेट की पकड़ कुल आबादी का 31 प्रतिशत है यानि कि देश में 40 करोड़ से अधिक लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं जो 2021 तक बढ़कर 73 करोड़ से अधिक होने की सम्भावना जताई जा रही है। इसी तरह देश में वर्तमान में 29 करोड़ स्मार्टफोन यूजर हैं। अनुमान है कि 2021 तक 18 करोड़ और नये यूजर जुड़ जाएंगे। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत में 993 विश्वविद्यालय, करीब 40 हजार कॉलेज हैं और 385 निजी विश्वविद्यालय हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि सोशल मीडिया की क्या महत्वत्ता है हमारे जीवन में। अगर लॉकडाउन के दौरान देखा जाए तो सोशल मीडिया से लोगों को काफ़ी ज्यादा मदद मिली है तथा लोगों का काम सुलभ हुआ है। ऐसा कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि सोशल मीडिया इन दिनों हमारे जीवन में खुशहाली लाया है।



#हमारे जीवन में सोशल मीडिया का महत्व।। 

#Importance of Social Media in our life.




               

Monday, 13 July 2020

भारत एक कृषि प्रधान देश सच या झूठ?



भारत को कृषि प्रधान देश कहा जाता है। कई दशक पहले देश के अधिकांश भागों में खेती का काम किया जाता था। उस समय लोग इतने आधुनिक नहीं थे और न ही लोगों के पास आज जैसे कोई आधुनिक उपकरण थे फिर भी किसान खुद से मिट्टी को चीर कर खेती करते थे। चूँकि हमारा देश उस वक़्त बहुत ज्यादा विकसित नहीं था इसलिए अधिकतर लोग कृषि पर निर्भर रहते थे। इस मिट्टी को अपना सर्वस्व मान कर इससे ज़िंदगी व्यतीत करते थे। उस समय कुछ कवियों के द्वारा एक किसान को स्वंय भगवान का रूप कहा गया है क्योंकि हमारा अन्नदाता खेत में काम करने वाला एक किसान है इसलिए उन्हें भगवान कहा गया। जैसे-जैसे देश में आधुनिकता को बढ़ावा मिला, नए नए रोजगार आए। नई-नई तकनीक आईं लोगों की रुचि कृषि की तरफ कम होने लगी तथा लोग दूसरे काम धंधो में लग गए। पिछली जनगणना के अनुसार हमारे देश में प्रतिदिन करीब 2200 लोग किसानी छोड़ रहे है। हाँ कृषि की तरफ उनका झुकाव कम होने का एक कारण यह भी है कि उन्हें अच्छी लागत नहीं मिलती है। ना ही उन्हें ज्यादा मदद मिलती है।

             लेकिन वर्तमान समय में जब कोरोना वायरस के कारण देश में लॉकडाउन लगाया गया। काफी संख्या में लोग पलायन करने पर विवश हो गए तथा फिर से अपनी जन्मभूमि की ओर निकल पड़े। ताजा आंकड़े के मुताबिक उत्तर प्रदेश, बिहार,मध्यप्रदेश, राजस्थान में लाखों की तादाद में लोग अपने घर लौटे है। जिसमे मजदूर वर्ग के लोगों की संख्या काफी ज्यादा है। इससे उन लोगों में कृषि की तरफ झुकाव होने की स्थिति बन सकती है। क्योंकि कहीं न कहीं इन लोगों की रुचि कृषि क्षेत्र में ज्यादा हो सकती है। मुझे तो पूर्ण विश्वास है कि फिर से हमारे देश में कृषकों की संख्या में वृद्धि होगी।

Thursday, 4 June 2020

कोरोना के बीच सामने आए मानवीय मूल्य

    कोरोना वायरस महामारी के बीच सरकार द्वारा लोगों की मदद के लिए हर सम्भव प्रयास की जा रही है। ऐसे में कई सारे लोग/संस्था है जो मदद के लिए आगें आये है। आज हम बात कर रहे है ऐसे ही एक छात्र संगठन के बारे में जिसने इस महामारी में न केवल लोगो की मदद की बल्कि उनके साथ खड़े है। मिथिला स्टूडेंट यूनियन के लोगों के द्वारा पिछले कई दिनों से लोगों के बीच खाना, मास्क आदि का वितरण किया जा रहा है साथ ही ये लोग, लोगों को कोरोना के प्रति जागरूक भी कर रहे है। इनलोगो के द्वारा गांव-गांव जा कर लोगो को कोरोना से बचने के उपाय बताए जा रहे है। इस नेक कार्य के बीच ये लोग सरकार के द्वारा जारी दिशा निर्देश का पालन भी कर रहे है तथा सोशल डिस्टेंस का ख्याल भी रख रहे है। इनलोगो के द्वारा चलाये जा रहे इस अभियान के तहत ग्रामीण इलाके में लोग काफी जागरूक हुए है क्योंकि गांव की बात करे तो वहां लोगों में जागरूकता की कमी देखी जाती है ऐसे में ये लोग घर घर जा कर उन्हें कोरोना के बारे में बताते है तथा खुद को इस बीमारी से कैसे बचाये यह भी बताते है। ऐसे में ये लोगो खुद की सुरक्षा का भी ख्याल रखते है।
                    इस संगठन की स्थापना 2015 में मिथिला क्षेत्र में शिक्षा प्रणाली, रोजगार, प्रवास के मुद्दों, साक्षरता, स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति और लघु उद्योगों की कमी को सुधारने के लिए की गई थी। आज इसकी सदस्यों की संख्या लाखों में है। यूँ तो इसका केंद्र मिथिला में विकास को लेकर है परंतु किसी भी आपदा के वक़्त यह पूरे बिहार के लिए खड़े रहते है। बिहार में जब भी विपत्ति पड़ी है यह तन मन धन से सामने आया है। 2017,2018,2019 में बाढ़ पीड़ितों को बचाने से लेकर उनके रहने खाने तक का इन्तजाम किया था, वहीं पिछले साल जब बिहार की राजधानी पटना पानी में समा गया था उस वक़्त भी यह लोगों की मदद के लिए आगे आया था। बिहार में चमकी बुखार के समय भी यही संगठन खड़ा था।
    आज एक बार फिर जब पूरी दुनिया कोरोना वायरस जैसे महामारी से लड़ रही है तब इस समय भी इसके द्वारा लोगों को अत्यधिक मदद पहुंचाया जा रहा है। अपितु बिहार से लेकर दिल्ली तक संगठन के द्वारा भोजन,मास्क, या जरूरत के समान उपलब्ध करा रहें है। दिल्ली तथा बिहार में करीब 40 दिनों तक 300 से 400 लोगों को दिन-रात भोजन कराया जा रहा था अगर मैं सच कहूं तो ऐसे नेक कार्य करने के बाद बड़ा ही आनंद महसूस होता है। इस वक़्त ये लोग अपनी जान की परवाह किये बगैर ही घर घर जा कर लोगो की मदद कर रहे है यह काफी अतुलनीय हैं।

Saturday, 30 May 2020

ये मिट्टी तुम्हे पुकार रही है


ये मिट्टी तुम्हे पुकार रही है, क्योंकि तुम हो विदेशों में रहते,
हम तो मजदूर है, हम रहेंगे ऐसे ही पलायन करते!!

तुम्हीं हो दाता-दिनकर तुम्हीं हो सच्चे देशभक्त,
हम भी निकले से घर से की बनेंगे अच्छे देशभक्त!!

तुम्हें लाने सरकार उड़ाए हवाई जहाज,
हमें छोड़ दिया है पलायन करने,
पता नहीं अभी भी कितने भूखे मजदूर,
सो रहे है पटरियों पर मरने!!

जिस हवाई पट्टी पर लैंड करता है तुम्हारे विमान,
उसे कभी बनाये थे हम मजदूर,
आज हम भूखे पेट सड़को पर चल रहे है,
कर दिये हो तुम हमें मजबूर!!

अच्छे दिन का सपना दिखाने, बन कर आये थे व्यापारी,
अच्छे दिन आयेंगे बोलकर, बदले में दिए हो बेरोजगारी!!

अब कितना कहूँ, कितना लिखूं,
हे माई बाप अब तो सुन लो मेरी आवाज-2!!

















बचपन वाला सरस्वती पूजा

 सरस्वती पूजा, ये पर्व महज एक दिन का होता है, लेकिन इसकी तैयारी में महीने भर से जुट जाते थे। लोगों को इकट्ठा करना, चंदा के लिए पैसे जुटाना, ...